नागौर 61 दिन यानि की लगभग दो माह के बाद बाद मंगलवार से मांगलिक कार्य शुरु होने जा रहे हैं। आम तौर पर मई और जून में शादियों का सीजन रहता था। इन दोनों माह में खूब शादियां होती थी, लेकिन इस साल शुक्र के अस्त होने के कारण विवाह के मुहूर्त नहीं थे। वहीं अब 61 दिन बाद शुक्र के उदय होने के कारण के मांगलिक कार्य शुरु होंगे। जुलाई माह में विवाह के पांच शुभ मुहूर्त हैं। इस मौके पर प्रदेश भर 50 हजार से ज्यादा शादियां होगी। इसके बाद एक बार फिर लंबे समय के लिए शादी के शहनाई बंद हो जाएंगी। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह के मुहूर्त के लिए गुरु, शुक्र और सूर्य का उदय रहना जरूरी माना जाता है। इस वर्ष 28 को अप्रैल को शुक्र और 7 मई का गुरु अस्त हो गए थे। जिसके कारण मई और जून में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं थे। शुक्र उदय होने के साथ मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। 5 जुलाई को सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर पश्चिम दिशा में शुक्र उदय के साथ हट गया। अभी शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि चल रही है साथ ही सभी शुभ कार्यों के लिए भी उचित समय है इस शुभ समय में विवाह कार्य मुंडन यज्ञोपवीत संस्कार नूतन गृह निर्माण तथा गृह प्रवेश आदि अनेक प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य करने का समय रहेगा ज्योतिष के अनुसार मांगलिक कार्यों के लिए नौ ग्रहों में गुरु और शुक्र का उदय अनिवार्य माना गया है। गुरु और शुक्र के उदय होने पर हर तरह के शुभ मुहूर्त बनते हैं। साथ ही, यदि रवि और गुरु का संयोग हो तो यह अधिक शुभ फलदायी होता है। जरूरत के अनुसार नौ,11, 12, 13 व 15 जुलाई को विवाह तथा रात्रि लग्न अनुसार विवाह के मुहूर्त रहेंगे।
तुलसी विवाह पर रहेगा विशेष मुहूर्त
अब गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ और विवाह आदि मांगलिक कार्य संपादित होंगे। चार महीनों के बाद हरिप्रबोधनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह के बाद पुन: मांगलिक कार्य आरंभ होंगे। कार्तिक शुक्ल देव प्रबोधिनी एकादशी से अर्थात 12 नवंबर से पुणे सभी शुभ मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे इस दिन तुलसी विवाह का भी विशेष मुहूर्त रहता है। लौकिक मान्यता के अनुसार 15 जुलाई को भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त में भी शुभ कार्य किए जा सकेंगे। सभी शुभ कार्य एकादशी अर्थात 17 जुलाई बुधवार तक सर्वश्रेष्ठ रहेगा और आषाढ़ माह के महिमा आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा व्यास पीठ पूजा दिवस के कारण और भी बढ़ जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से देव प्रबोधिनी एकादशी अर्थात कार्तिक शुक्ल एकादशी तक सभी प्रकार के विवाह आदि मांगलिक कार्य पर विराम लग जाता है इस समय को देवसेना नाम से जाना जाता है इस समय में जग के पालनहार श्री हरि भगवान विष्णु राजा बलि के पास पाताल लोक में निवास करते हैं