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Nagaur patrika…मिलीभगत के काले खेल में राज्य सरकार को करोड़ों की हर दिल लगाई जा रही रही चपत…VIDEO

नागौर. पान मसाला के उत्पादों से भरी गाडिय़ां रोजाना सडक़ों पर दौड़ रही है, लेकिन जिम्मेदारों के पास जांच की फुरसत तक नहीं है। इसके चलते सरकार को प्रतिदिन करोड़ों के राजस्व की चपत लग रही है। जीएसटी के इस खेल में कथित रूप से मिलीभगत की वजह से सरकार को प्रतिदिन करोड़ों के राजस्व […]

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नागौर. पान मसाला के उत्पादों से भरी गाडिय़ां रोजाना सडक़ों पर दौड़ रही है, लेकिन जिम्मेदारों के पास जांच की फुरसत तक नहीं है। इसके चलते सरकार को प्रतिदिन करोड़ों के राजस्व की चपत लग रही है। जीएसटी के इस खेल में कथित रूप से मिलीभगत की वजह से सरकार को प्रतिदिन करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। विशेष रूप से राजस्व का सर्वाधिक नुकसान पान मसाला के उत्पादों में राजस्व नुकसान का आंकड़ा बढऩे लगा है। टेक्स चोरी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डीलरों के पास खरीद का बिल तक नहीं रहता है। सूत्रों की माने तो डीलर को संबंधित कंपनी से ही बिल प्राप्त नहीं होता है तो फिर वह दूसरों को बिल कहां से देगा। इससे व्यापक स्तर पर टेक्स चोरी का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।
राज्यकर विभााग की ओर से बरती जा रही बेपरवाही की कीमत सरकार को प्रतिदिन करोड़ों के राजस्व की हानि के तौर पर चुकानी पड़ रही है। जयपुर, अजमेर, कोटा, नागौर, सिरोही, पाली, श्रीगंगागनर, करोली, प्रतापगढ़, सीकर आदि जिलों में दौड़ती गाडिय़ों की जांच हो तो तस्वीर खुद-ब-खुद सामने आ जाए, लेकिन ऐसा हेाता नहीं है। जांच के नाम पर जिम्मेदारों की सुस्ती के चलते उत्पादों से भरी यह गाडिय़ां माल उतार कर अपने गंतव्यों तक सहजता से रवाना हो जाती है।इस दौरान इनकी रोक-टोक करने वाला कोई नहीं रहता है। यह स्थिति अकेले नागौर एरिया की नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश की बनी हुई है। यह स्थिति तब है, जबकि राज्य कर विभाग की भारी-भरकम फौज की तैनातगी हो रखी है। भारी भरकम राजस्व नुकसान होने के बाद भी राज्य कर विभाग के अधिकारियों की नजर में ऑल इज वेल है।
इस तरह से लगा रहे जीएसटी का चूना
पान मसाला के उत्पादों में जीएसटी के खेल में कथित रूप से संलिप्तता के चलते रिटेलर दुकानदारों के पास डीलर से पान मसाला के खरीद की कोई रसीद ही नहीं मिलती है। डीलर से पान मसाला लेने के बाद इसमें दुकानदारों को भी खरीद की कोई रसीद तक नहीं दी जाती है। यानि की डीलर के पास से पान मसाला सीधे दुकान पर आया, और बेच दिया गया। बताते हैं कि दुकानदारों में से किसी ने गलती से रसीद मांग भी तो, तो भी नहीं दी जाती है। सूत्रों के अनुसार खुद डीलर तक को रसीद नहीं मिलती तो वह कहां से देगा। इस पूरे गड़बड़झाले के खेल में चूना सरकार को लग रहा है, और मुनाफा डीलर एवं संबंधित कंपनियां जमकर उठा रहीं हैं।
टेक्स के इस आंकड़े में होती है बाजीगिरी
विशेषज्ञों के अनुसार पान मसाला पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगती है। सेस पान मसाला पर माल का 60 प्रतिशत लगता है। इस तरह से कुल 88 प्रतिशत टेक्स हो गया। इसी तरह से जर्दा पर 160 प्रतिशत लगता है। यानि की जर्दा पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ शेष 160 प्रतिशत जोडऩे पर टैक्स भी बढ़ जाता है। यह पूरे आंकड़े तभी दर्शाए जा सकते हैं जब रसीद दी जाए, लेकिन रसीद नहीं दिए जाने की स्थिति में यह राजस्व भी कथित रूप से खुर्दबुर्द कर दिया जाता है। इस तरह से प्रति पान मसाला की बिक्री में सरकार को मिलीभगत के चलते भारी-भरकम राजस्व नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व इस विषय को राजस्थान पत्रिका की ओर से प्रकाश में लाए जाने के बाद राज्यकर आयुक्त विभाग की ओर से कार्रवाई करते हुए सीटीओ एवं निरीक्षकों आदि के तबादले कर दिए थे। इससे उम्मीद थी कि अब सरकार को राजस्व मिलेगा, लेकिन इसके बाद भी वही स्थिति बनी हुई है।
इनका कहना है…
विभाग की ओर से यथासमय निर्देशानुसार कार्रवाइयां की जाती रही है। मुख्यालय से इस संबंध में दिशा-निर्देश मिलने पर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
पूरण सिंह, उपायुक्त, राज्यकर विभाग अजमेर