
दुबई से घर लौटे टीकमचन्द कुमावत जब अपनी मां से मिले तो खुशी फूट पड़ी। फोटो: पत्रिका
नागौर। कभी मिसाइलों की आवाज, कभी सायरन और हर पल अनिश्चितता का डर। दुबई में फंसे हिराणी गांव के श्रमिक टीकमचंद कुमावत के लिए बीते आठ दिन दशहत भरे रहे। जब वे सुरक्षित अपने गांव हिराणी पहुंचे तो परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पूरे ग्रामवासियों ने राहत की सांस ली।
टीकमचंद गत दो वर्षों से दुबई में मजदूरी कर रहा था। वह 28 फरवरी को होली का त्योहार मनाने भारत आने वाला था। इसी बीच ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बने युद्ध जैसे हालात के कारण एयरपोर्ट बंद हो गए और वह दुबई में ही फंस गया। अचानक बिगड़े हालातों के कारण कई दिन तक घर लौटने की उम्मीद धुंधली पड़ गई।
आठ दिन बाद टीकमचंद सुरक्षित अपने गांव पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। डीजे के साथ जुलूस निकालते हुए उन्हें घर लाया गया घर पहुंचते ही पिता प्रभुराम सोकल, माता मुन्नी देवी, पत्नी और अन्य परिजन उन्हें देखकर भावुक हो गए। उन्हें गले लगाकर अपनी खुशी जाहिर की। बाद में परिवार ने केक काटकर खुशियां मनाईं। इस दौरान पूर्व पार्षद नेमीचंद कुमावत सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
टीकम ने बताया कि होटल में फंसे होने के बाद 7 मार्च को भारत सरकार की ओर से विमान दुबई भेजा गया, जिसमें भारतीय यात्रियों को वापस लाया गया। यह विमान शाम करीब 6.30 बजे दुबई से रवाना होकर रात 11 बजे दिल्ली पहुंचा। भारत सरकार के प्रयासों से वे सुरक्षित घर लौट सके हैं। दुबई और आसपास के शहरों में अब भी कई भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं।
कुमावत ने बताया कि युद्ध जैसे माहौल में हर दिन और हर रात बेहद भयावह थी। परिवार से दूर रहकर अनिश्चित हालातों में समय बिताना बहुत मुश्किल हो रहा था। उनके साथ कई अन्य भारतीय नागरिक भी वहां फंसे हुए थे, सभी अपने घर लौटने की राह देख रहे थे। 28 फरवरी को जब वे भारत लौटने के लिए दुबई एयरपोर्ट पहुंचे, उसी समय एयरपोर्ट के पास एक मिसाइल गिरने से चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए भागने लगे।
एयरपोर्ट के सुरक्षाकर्मियों और दुबई पुलिस ने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। बाद में उन्हें एक होटल में ठहराया गया, जहां वे करीब आठ दिनों तक रुके रहे। इस दौरान वहां भारत लौटने वाले कई लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा कि दुबई में हो रहे हमलों को अपनी आंखों से देखना बेहद डरावना अनुभव था।
Published on:
09 Mar 2026 09:58 am
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