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नसबंदी के बाद हुई बेटी तो पिता पहुंचा अदालत, अब 21 वर्ष तक सरकार उठाएगी पढ़ाई का खर्च, हर महीने देगी 10 हजार रुपए

मेड़ता की स्थायी लोक अदालत ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। दरअसल, नसबंदी के बाद भी एक महिला गर्भवती हो गई और उसने बेटी को जन्म दिया। इस संबंध में दम्पती की ओर से स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया गया।

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मेड़ता सिटी (नागौर) @ पत्रिका. मेड़ता की स्थायी लोक अदालत ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। दरअसल, नसबंदी के बाद भी एक महिला गर्भवती हो गई और उसने बेटी को जन्म दिया। इस संबंध में दम्पती की ओर से स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया गया। अदालत ने फैसला सुनाया कि सरकार इस परिवार को 6 लाख रुपए दे और बच्ची की उम्र 21 वर्ष होने तक उसकी पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्च भी उठाए।

स्थायी लोक अदालत के पूर्णकालिक अध्यक्ष सतीश कुमार व्यास ने अपने फैसले में राज्य सरकार को यह निर्देश दिए कि एक महीने के भीतर दम्पती को 6 लाख रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएं। पीड़ित दम्पती की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट खुशवंत सिंह सांदू ने बताया कि लोक अदालत ने राज्य सरकार को क्षतिपूर्ति राशि देने के अलावा भी यह भी आदेश दिए कि नसबंदी के बाद जिस बेटी ने जन्म लिया है,
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उसके 5 साल की होने के बाद 21 साल की होने तक प्रतिमाह दम्पती को उसके लालन-पालन के लिए 10 हजार रुपए राज्य सरकार की ओर से दिए जाएं। साथ ही 5 साल की उम्र के बाद जब बालिका सरकारी या निजी विद्यालय में पढ़ाई करे तो बालिका के स्नातक होने तक उसका पूरा खर्च राज्य सरकार ही वहन करेगी। अदालत ने यह भी कहा कि बालिका को चिकित्सकीय सुविधा की जरूरत है तो 21 वर्ष की आयु तक उस बालिका को राज्य सरकार की ओर से निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

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3 संतान के बाद भी चुनाव लड़ सकेंगे मां-बाप
इस मामले में लोक अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि बालिका के माता-पिता तीन संतान होने के बावजूद भविष्य में कभी भी कोई भी चुनाव लड़ सकते हैं। चूंकि नसबंदी के बाद महिला ने बेटी को जन्म दिया है, इसलिए उन्हें तीन संतान होने पर चुनाव लड़ने से वंचित नहीं किया जा सकेगा।