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शहीद मनोहर सिंह ने गलवान घाटी में भी दिखाई थी वीरता

कुचेरा (nagaur). डेगाना पंचायत समिति क्षेत्र के अलवास गांव के शहीद मनोहर सिंह सिसोदिया का पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर में शहीद मनोहर सिंह अमर रहे व वन्देमातरम् के गगनभेदी जयकारों के बीच पंचतत्व में विलीन हो गया।

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शहीद मनोहर सिंह ने गलवान घाटी में भी दिखाई थी वीरता

डेगाना. शहीद मनोहरसिंह के अंतिम दर्शनों के लिए रेलवे जंक्शन के सामने उमड़े डेगाना शहर के लोग।


जयकारों के बीच शहीद का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन

-अलवास में सैन्य सम्मान से किया अंतिम संस्कार

-सेना के जवानों ने दी सशस्त्र सलामी

- शहीद मनोहर सिंह अमर रहे के नारों से गूंजा गगन

- कई जनप्रतिनिधियों व सैन्य अधिकारियों ने दी पुष्पांजलि

गगनभेदी जयकारों के बीच युवाओं व ग्रामीणों के हुजुम के साथ शहीद का पार्थिव शरीर डेगाना बाईपास पुलिया से रवाना होकर रेंवत, जालसू खुर्द, जालसू कलां, जालसू नानक, खींदास, आंतरोली कला, खातोलाई से होता हुआ पैतृक गांव अलवास लाया गया। वहां शहीद मनोहर सिंह को माता-पिता व परिजनों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी। उसके बाद अंतिमयात्रा गांव के राजकीय विद्यालय के सामने स्थित सार्वजनिक मैदान पहुंची। वहां पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। चचेरे भाई आयुष्मान सिंह ने शहीद की चिता को मुखाग्नि दी। चाईना के साथ झड़प के समय वे गलवान घाटी में तैनात थे। उस समय मनोहर सिंह भी साथ था। गलवान घाटी ऑपरेशन में मनोहर सिंह ने भी अन्य सैनिकों के साथ बहादुरी का परिचय दिया था। उस ऑपरेशन के बाद मनोहर 39 राष्ट्रीय राइफल में चले गए थे। वे पूंछ सेक्टर में अग्रिम चौकियों पर तैनात थे।


जनप्रतिनिधियों व सैन्य अधिकारियों ने किए पुष्पचक्र अर्पित

उससे पहले डेगाना विधायक विजयपाल मिर्धा, पूर्व मंत्री अजय सिंह किलक, मेड़ता प्रधान संदीप चौधरी, डेगाना उपखण्ड अधिकारी मुकेश चौधरी, तहसीलदार रामनिवास बाना, 3 ग्रेनेडियर के नायब सूबेदार जुगराज, सूबेदार आशाराम, लांस नायक रविकांत, ग्रेनेडियर रणजीत, ग्रेनेडियर शिवराम, ग्रेनेडियर ओमप्रकाश व नायक महेंद्र, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड नागौर से सैनिक कल्याण संगठक रिछपाल सिंह, गौरव सैनिक रामपाल जावली, शहीद के चाचा गौरव सैनिक दिलीप सिंह सिसोदिया, मामा गौरव सैनिक मदन सिंह बच्छवारी, बिश्नोई महासभा वन एवं वन्यजीव रक्षा समिति के जिला उपाध्यक्ष रामस्वरूप बिश्नोई, पर्यावरण प्रेमी व गोसेवक शंकरलाल भादू रेण सहित कई जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व सैन्य अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
जवानों ने सशस्त्र सलामी दी

पुष्पांजलि के बाद शहीद को सेना के जवानों ने सशस्त्र सलामी दी। बाद में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए क्षेत्र के युवाओं व ग्रामीणों का डेगाना से अलवास तक करीब तीन किलोमीटर तक लम्बा काफिला बन गया। जिसमें शहादत के तराने गूंजते डीजे, हाथों में तिरंगे लिए शहीद को सलामी देते युवा, ग्रामीणों के साथ राजपूत समाज के लोग शामिल थे।
छुट्टी पर आए साथियों ने भी श्रद्धांजलि दी

शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए क्षेत्र में छुट्टी पर आए उनके साथी सैनिक व गौरव सैनिक भी पहुंचे। 39 राष्ट्रीय राइफल के राजोद निवासी राजवीर राठौड़, नन्दू राठौड़, राजेन्द्र राठौड़, गणपतराम मेघवाल सहित कई सैनिक अलवास पहुंचे। राजपूत समाज क्षत्रिय सेवा समिति डेगाना के अध्यक्ष अजीत सिंह चांदारूण, पूर्व सरपंच डॉ. भंवर सिंह राठौड़, जयेन्द्र सिंह बीका, अर्जुन सिंह डोटोलाई, करण सिंह मिरगानैणी, शिम्भुसिंह तिलानेस, ए यू बैंक शाखा प्रबंधक वर्धमान जैन, नितिन सिंह राठौड़, महेन्द्र सिंह बच्छवारी ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूंछ सेक्टर की अग्रिम चौकी पर थे तैनात

मनोहर सिंह के साथ पहुंचे 3 ग्रेनेडियर के नायब सूबेदार जुगराज ने बताया कि वे सिसोदिया 39 राष्ट्रीय राइफल में जम्मू के पूंछ सेक्टर की अग्रिम चौकी पर तैनात थे। ड्यूटी के दौरान हुई बर्फबारी की चपेट में आकर घायल हो गए। उसके बाद उन्हें पंजाब के जालंधर स्थित भारतीय सेना के बेस अस्पताल में उपचार के लिए रैफर किया गया। वहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
बहादुरी व जज्बातों में तेज था मनोहर

मनोहर सिंह पांच साल पूर्व भारतीय सेना की 3 ग्रेनेडियर में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वे 39 राष्ट्रीय राइफल में जम्मू क्षेत्र में तैनात थे। उनके साथ अधिकारी रहे 3 ग्रेनेडियर के नायब सूबेदार जुगराज ने बताया कि मनोहर सिंह बहादुरी व जज्बातों में सबसे तेज थे। हर ऑपरेशन में वे अपने साथ मनोहर सिंह को ही ले जाते थे। किसी भी काम के लिए कहने पर वे हर समय तैयार रहते थे।


पिता को सौंपा तिरंगा

शहीद की पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे सेना के अधिकारियों नायब सूबेदार जुगराज, सूबेदार आशाराम, लांस नायक रविकांत, ग्रेनेडियर रणजीत, ग्रेनेडियर शिवराम, ग्रेनेडियर ओमप्रकाश व नायक महेंद्र ने शहीद की पार्थिव देह पर ओढाया गया तिरंगा उनके पिता ओंकार सिंह व चाचा गौरव सैनिक दिलीप सिंह सिसोदिया को सौंपा तो सबकी आंखों में आंसू व सीने में बहादुरी झलक रही थी।