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मीरा और जगदीश ने फिर साथ चलने का किया फैसला

शिष्टाचार और गरिमा से रहने का संकल्प

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Newly married girl

नवविवाहिता

मेड़ता सिटी।
घर के मनमुटाव जब गंभीर रूप ले लेते हैं तो कई बार बात मुकदमों तक पहुंच जाती है. ऐसा ही मेड़ता क्षेत्र के रलियावता गांव की विवाहिता मीरा और उसके पति जगदीश जाट के बीच हुआ। लम्पोलाई गांव की मीरा लटियाल का विवाह रलियावता के जगदीश से वर्ष 2010 में हुआ था. लेकिन इस वर्ष जून में पति-पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच का विवाद इतना बढ़ गया कि मीरा ने मेड़ता के सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अपने पति, सास-ससुर और देवर-देवरानी के खिलाफ दहेज की मांग, प्रताडऩा, मारपीट आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया. मीरा के मुताबिक इसके सिवा कोई रास्ता नहीं बचा था और रिश्तेदारों की समझाईश भी बेअसर रही थी।

सिविल न्यायाधीश मेड़ता ने यह मामला 18 जून को मेड़ता स्थित परिवार कल्याण समिति को सौंप दिया. समिति ने 20 जून से हर हफ्ते सुनवाई की और सभी पक्षों को समझाने का प्रयास किया. दम्पती के एक पुत्री भी है और उसके भविष्य को लेकर भी समिति को अतिरिक्त चिंता थी। आखिरकार 10 जुलाई को चौथी सुनवाई में दंपती साथ-साथ रहने को राजी हो गए। एक लिखित समझौता दोनों पक्षों में हो गया। दोनों पक्षों ने अब सामाजिक शिष्टाचार और गरिमा से रहने का संकल्प लिया है। इस दौरान न्यायाधीश मोटरयान दावा प्राधिकरण, मेड़ता रामेश्वर प्रसाद ने दोनों पक्षों के सुखद भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने समिति के प्रयासों की सराहना की। सचिव, विधिक सेवा प्राधिकरण, दीपक पराशर ने बताया कि दिसंबर से अब तक समिति की कोशिशों से कई घर फिर से बस गए है। समिति ने अपने गठन को सार्थक किया है। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष एडवोकेट लक्ष्मण सिंह राठौड़, सदस्य डॉ. अशोक चौधरी और प्रेम देवी भी उपस्थित थे। प्राधिकरण कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक रामकरण चोयल और सहायक आरिफ खान ने सम्पूर्ण कार्रवाई का संचालन किया।
‘पारिवारिक विवाद की वजह से भावी पीढ़ी पर भी होता है असर’

समिति के पास आये अधिकतर मामलों में यह सामने आया है कि सामाजिक नियंत्रण की कमी से घर टूट रहे हैं या घरों में तनाव है. व्यक्तिगत अहंकार और एकल परिवार में रहने की इच्छा भी कई मामलों की जड़ में देखे गए हैं. सास-बहू के रिश्ते भी ऐसे विवादों के कारण बनते हैं. जल्दबाजी में किये गए रिश्ते भी परिवारों में समन्वय में खटकते हैं. ऐसे सभी कारणों पर विचार करके प्रशासन को अभियान चलाना चाहिए, जिसमें सामाजिक रिश्तों को निभाने की सीख हो. स्कूल-कॉलेज में भी सामाजिक रिश्तों पर सकारात्मक मंथन होना चाहिए. समाज के छोटे छोटे तनाव कई समस्याओं को जन्म देते हैं और विशेषकर बच्चों पर इन विवादों का बुरा असर पड़ता है।
- डॉ. अशोक चौधरी, सदस्य, परिवार कल्याण समिति, मेड़ता