फजर के बाद कुरान ख्वानी से आगाज़, जियारत, तबर्रुकात व फातिहा के साथ इबादत का चला सिलसिला
अकीदतमंदों की ओर से अजमेर शरीफ की चादर हुई पेश
नागौर. ख्वाजा अब्दुस्सलाम चिश्ती सुलेमानी दरगाह डयोढ़ी शरीफ में बड़ा उर्स अकीदत के साथ मनाया गया। उर्स की शुरुआत फजर की नमाज के बाद कुरान ख्वानी, जियारत, तबर्रुकात और फातिहा से हुई। इस दौरान दरगाह परिसर में दिन भर अकीदतमंदों की ओर से चादर पेश करने के सथ ही अकीदत के फूल पेश करने का सिलसिला चलता रहा। इस मौके पर लंगर का एहतमाम भी किया गया। शिजरा खानी और दुआओं के साथ उर्स की रिवायतें अदा की गई। दरगाह डयोढ़ी शरीफ के सज़्ज़ादानशीन पीर गुलाम शब्बर चिश्ती सुलेमानी ने बताया कि दरगाह परिसर में हुई अजमत-ए-औलिया कॉन्फ्रेंस में सूफी संतों के पवित्र संदेश, आपसी भाईचारा, सामाजिक एकता और नशा मुक्ति व्याख्यान दिया गया। इसमें मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान से आए उलेमाओं ने शिरकत की। इस दौरान नमाज जोहर के बाद जुलूस के रूप में अजमेर शरीफ से लाई गई चादर अकीदतमंदों की ओर से आस्ताना आलिया पर पेश की गई। इस दौरान निकले जुलूस में काफी संख्या में जायरीन शामिल हुए। दरगाह में चादरपोशी की रस्म को उर्स की प्रमुख परंपरा के रूप में अदा की गई। नमाज इशा के बाद सूफियाना कव्वाली की महफिल सजी। इसमें कव्वालों ने एक से बढक़र एक सूफियाना कलाम किया। उर्स का समापन कुल की रस्म के साथ हुआ।