
Changemaker Sawaisingh choudhary
नागौर. रिटायर्ड डीजीपी सवाईसिंह चौधरी राजस्थान पत्रिका के चेंजमेकर के रूप में नामांकित हैं और पिछले काफी समय से स्वच्छ राजनीति के लिए विधायक का चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे हैं।
उनके विजन एवं चुनावी मुद्दों को लेकर राजस्थान पत्रिका ने चौधरी से बात की तो उन्होंने औपचारिक एवं अनोपचारिक रूप से कई बातें बताईं। उनका कहना है कि लम्बे समय तक पुलिस सेवा में रहने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि समाज व दूषित हो रही राजनीति में बदलाव के लिए अच्छे व स्पच्छ छवि वाले लोगों को राजनीति में आना होगा। बाहर से छिंटाकशी करने या आरोप लगाने से राजनीति स्वच्छ होने की बजाय केवल माहौल दूषित होगा। चौधरी ने बताया कि राजनीति में आने का वे सोच ही रहे थे कि राजस्थान पत्रिका ने चेंजमेकर महाअभियान चलाकर उनकी राह आसान कर दी। उन्हें इस अभियान से एक दिशा मिली और वे चेंजमेकर के रूप में नामित हो गए।
कृषि और उद्योगों का विकास जरूरी
चौधरी से जब उनके विजन के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि नागौर जिला कृषि प्रधान है, जहां 90 प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्यों पर निर्भर है। शेष जनसंख्या भी कृषि से जुड़ी हुई है, फिर चाहे उद्योग या फिर व्यापारी। क्योंकि किसान खुशहाल होगा तो ही व्यापारी के गल्ले में पैसा आएगा। ऐसे में सबसे पहले कृषि को आधुनिक बनाना होगा, किसानों को उन्नत कृषि एवं आधुनिक तकनीक की जानकारी देनी होगी। हालांकि सरकार ने जिला मुख्यालय पर कृषि अनुसंधान केन्द्र एवं कृषि विज्ञान केन्द्र खोल रखे हैं, जो नागौर विधानसभा क्षेत्र के ही हिस्से हैं, लेकिन यहां मोटी तनख्वाह पाने वाले वैज्ञानिक सरकारी योजनाओं की क्रियान्विति सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही स्थिति उद्योगों की है। रीको विस्तार एवं छोटे उद्यमियों को भूखंड उपलब्ध कराने के लिए बालवा रोड पर जमीन अधिग्रहण होने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। यदि छोटे उद्यमियेां को यहां भूखंड एवं अन्य सुविधाएं मिले तो नागौर का उद्योग नए आयाम छू सकता है। नागौर का हैण्डटूल्स उद्योग एक समय देशभर में अपनी विशेष पहचान रखता था, लेकिन आज दम तोड़ रहा है, वजह सिर्फ यह है कि स्थानीय कारीगरों को न तो उन्नत तकनीकी की जानकारी दी जा रही है और न ही इस उद्योग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
शिक्षा व चिकित्सा पर भी देंगे ध्यान
चौधरी ने बताया कि किसी भी समाज की प्रगति शिक्षा पर निर्भर करती है, ऐसे में यदि बच्चों को ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी शिक्षा मिल जाए तो परिणाम अलग ही होंगेे। सरकार सरकारी स्कूलों पर बजट तो खर्च करती है, लेकिन उसका परिणाम नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों के पद आज भी ग्रामीण क्षेत्र की सुदूर स्कूलों में खाली पड़े हैं। चिकित्सा क्षेत्र में भी सुधार करने की गुंजाइश है, जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सा संसाधनों में डॉक्टरों के पद भरने के प्रयास किए जाएंगे।
सड़क एवं सीवरेज व्यवस्था सुधारेंगे
विधानसभा क्षेत्र में सड़कों की स्थिति सुधारेंगे। बिजली, पानी, सीवरेज एवं सड़क बनाने वाले विभागों का आपसी समन्वय नहीं होने के कारण आमतौर पर देखने को मिलता है कि सड़कों को बार-बार तोड़ा जाता है, जिससे जनता का लाखों-करोड़ों रुपए बर्बाद होता है और सुविधाएं नहीं मिल पाती। हम ऐसी व्यवस्था करेंगे, जिसमें पहले पानी की लाइन, सीवरेज लाइन सहित अन्य काम होंगे, उसके बाद सड़क निर्माण का काम करवाएंगे, ताकि बार-बार सड़क को तोडऩा नहीं पड़े। गांवों में भी ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए काम करेंगे।
Updated on:
10 Oct 2018 06:03 pm
Published on:
10 Oct 2018 06:02 pm
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