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बेटी के जन्म पर परदादा ने चढ़ी सोने की सीढ़ी

- परिवार की चौथी पीढ़ी में कन्या जन्म पर किया सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत- मूथा परिवार ने पेश कि मिसाल

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चारों पीढ़ी एक साथ

नागौर. बेटी बचाओ, सम्मान दिलाओ, बेटा घर का चिराग है तो बेटी घर की ज्योति है। बेटा एक घर को रोशन करता है, बेटी दो घर को रोशन करती है। इसी उद्देश्य के साथ चौथी पीढ़ी में लड़के के जन्म पर आयोजित होने वाले स्वर्ण-सीढ़ी आरोहण की परम्परा को मूथा की बारी निवासी सेवानिवृत लेखाकार उदयनारायण मूथा ने अपने परिवार में पौत्री बालिका गर्विता के जन्म पर निभाकर समाज में मिसाल कायम की है। मूथा ने बताया कि सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार किसी परिवार में चौथी पीढ़ी में लड़के का जन्म होने पर परदादा व परदादी को सोने की सीढ़ी चढ़ाने की परम्परा है।

इस प्रकार होता है कार्यक्रम
इसमें परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर परदादा-परदादी की गोद में नवजात शिशु को बैठाकर पूर्व से तैयार स्वर्ण सीढ़ी से उनके पैरों का स्पर्श करवाकर यह रस्म सम्पन्न करवाते हैं। बाद में यह सीढ़ी घर की बेटियों को उपहार स्वरुप भेंट की जाती है।
सफल माना जाता है जीवन
उन्होंने बताया कि मान्यतानुसार स्वर्ण सीढ़ी चढऩे वाले वरिष्ठजन अपने जीवनकाल में परिवार की चौथी पीढ़ी देखकर अपने जीवन को सफल मानते हैं।
बेटा-बेटी एक समान
मूथा का कहना है कि वर्तमान परिवेश में बेटा-बेटी एक समान है। बेटियां घर की लक्ष्मी होती है। अपनी परपौत्री के जन्म पर प्रथा से हटकर कार्य करने से गौरान्वित महसूस कर रहा हूं। बंशीवाला मंदिर के पास स्थित पुष्करणा समाज की न्यात की पोल में हुए कार्यक्रम में माता-पिता अजंलि- अंकित, दादी-दादा राजेश- ओमप्रकाश, परदादी उदयनारायण, परिवार की वरिष्ठ बृजकंवर, सुशीला देवी सहित कैलाश मूथा, दिलीप मूथा, शैलेन्द्र मूथा, भुवनेश मूथा सहित परिवार के काफी लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर पुष्करणा समाज के प्रत्येक घर में लड्डू बांटे गए।
बदला रिवाज
रविवार को हुए इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि चौथी पीढ़ी में लड़की होने पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। जबकि सोने की सीढ़ी चढ़ाने की परम्परा लड़के के जन्म पर निभाई जाती है। मूथा परिवार ने लड़की के जन्म पर इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजित कर समाज को सकारात्मक सोच का संदेश दिया है।