12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजमेस की ढिलाई : नागौर मेडिकल कॉलेज का यह सत्र भी न चला जाए खाली

नागौर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने से पहले होना है एनएमसी का निरीक्षणराजमेस ने पूरी नहीं की कमियां, न स्टाफ लगाया और न ही इक्विपमेंट दिए

2 min read
Google source verification
Nagaur Medical College admission process hampered due to neglect of Rajmes

Nagaur Medical College admission process hampered due to neglect of Rajmes

नागौर. राजस्थान चिकित्सा शिक्षा सोसाइटी (राजमेस) की ढिलाई नागौर के लिए भारी पड़ सकती है। नागौर की मेडिकल कॉलेज को चालू करने को लेकर यदि गंभीरता से नहीं सोचा गया तो इस वर्ष भी प्रवेश प्रक्रिया अटक सकती है। ऐसा अंदेशा इसलिए जताया जा रहा है, क्योंकि आगामी दिनों में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) का निरीक्षण होना है और राजमेस ने अब तक न तो स्टाफ की नियुक्ति की है और न ही इक्विपमेंट दिए हैं, ऐसे में नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया अटक सकती है।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने 4 अक्टूबर 2019 को मेडिकल कॉलेज के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी की थी, लेकिन कॉलेज भवन का शिलान्यास 9 मार्च 2022 को किया गया। ठेकेदार कम्पनी को दिए गए वर्क ऑर्डर के अनुसार मेडिकल कॉलेज के एकेडमिक ब्लॉक का काम 15 महीने में पूरा करना था, लेकिन आज 25 महीने बीतने के बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया है। इसके चलते गत वर्ष कॉलेज में प्रवेश नहीं दिए जा सके। वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस बार भी प्रवेश प्रक्रिया ठंडे बस्ती में जा सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एनएमसी ने गत दिनों जेएलएन अस्पताल के पीएमओ को नोटिस देकर 14 अप्रेल तक कमियां पूरी करने के लिए कहा था, ताकि निरीक्षण किया जा सके। एनएमसी का पत्र मिलने के बाद पीएमओ ने राजमेस को पत्र लिखा, लेकिन राजमेस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

एक नजर : नागौर मेडिकल कॉलेज
- कुल राशि 325 करोड़
- 195 करोड़ भारत सरकार का हिस्सा
- 130 करोड़ राज्य सरकार का हिस्सा
- 9 मार्च, 2022 को किया था शिलान्यास
- 15 महीने में पूरा करना था एकेडमिक ब्लॉक का काम

7 महीने पहले आरयूएचएस से मिल चुकी संबद्धता
नागौर जिला मुख्यालय की मेडिकल कॉलेज को सितम्बर 2023 में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) ने संबद्धता जारी कर दी थी। जिसके तहत कॉलेज को एमबीबीएस की 100 सीट मिली है। अब नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) का निरीक्षण होना है, इससे पहले प्रथम वर्ष के हिसाब से स्टाफ की नियुक्ति, लैब इक्विपमेंट आदि आने हैं, लेकिन काम की गति धीमी होने से मामला खटाई में पड़ सकता है।

निर्माण कार्य भी चल रहा है धीमा
मेडिकल कॉलेज के एकेडमिक भवन एवं छात्रावास सहित अन्य भवनों का काम काफी धीमी गति से चल रहा है। 15 महीने की बजाए 25 महीने बीतने के बावजूद काम अधूरा पड़ा है। कॉलेज को आवंटित 100 बीघा जमीन की चार दीवारी का काम आरएसआरडीसी को करना था, लेकिन अब तक काम शुरू ही नहीं हो पाया है, शुरू करने के बाद पूरा करने में छह महीने से अधिक समय लगेगा।

राजमेस को पत्र लिख दिया
नागौर मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की नियुक्ति व इक्विपमेंट देने के लिए एनएमसी ने गत 4 अप्रेल को नोटिस भेजा था, जिसके बाद मैंने राजमेस को पत्र लिखकर अवगत करवा दिया। क्योंकि एनएमसी ने जो कमियां बताई हैं, वे राजमेस के स्तर से ही पूरी की जानी है।
- डॉ. महेश पंवार, पीएमओ, जेएलएन अस्पताल, नागौर