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अपराधों पर रोकथाम के लिए पुलिस खड़ी कर रही है ‘मित्रों की फौज’

गत 9 माह में नागौर पुलिस ने बनाए 769 ‘पुलिस मित्र’, गत वर्ष जून में पुलिस महानिदेशक ने जारी किए थे आदेश

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Police Mitra plan failed to meet objectives in pokhran

6 माह में 8 थानों में पुलिस को मिले केवल 44 ‘मित्र’

नागौर. जिले सहित प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत करने, अपराधों की रोकथाम एवं सामाजिक गतिविधियों में पुलिस की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस समाज में ‘पुलिस मित्रों’ की फौज खड़ी कर रही है। नागौर पुलिस ने पिछले करीब 9 माह में 769 पुलिस मित्र बना लिए हैं, जबकि 188 कतार में हैं तथा 494 को पुलिस ने रिजेक्ट भी किया है।

गौरतलब है कि राजस्थान के तत्कालीन महानिदेशक पुलिस कपिल गर्ग ने 27 जून 2019 को एक आदेश जारी कर ‘पुलिस मित्र योजना’ की शुरुआत की थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान पुलिस को मित्रों की जरूरत है। कई बार छोटी सूचना पर बड़े अपराधी पकड़े जाते हैं। इसलिए पुलिस मित्र योजना शुरू की गई। योजना को लेकर पुलिस अधिकारियों ने सीएलजी की बैठकों व अन्य कार्यक्रमों में जागरूक लोगों को जानकारी दी तो लोगों ने भी उत्साह दिखाया और प्रदेश में अब तक करीब 18 हजार से ज्यादा पुलिस मित्र बन गए हैं।

क्या है पुलिस मित्र योजना
प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत करने और पुलिस प्रणाली की गुणवता बढ़ाने के लिए समाज से जुड़ाव बनाने के उद्देश्य पुलिस मित्र योजना शुरू की गई थी। इसके लिए सर्वे करवाया तो कई लोगों की पुलिस के साथ जुडऩे की लिए सुझाव भी आए थे। कोतवाली थानाधिकारी अमराराम खोखर ने बताया कि जुडऩे वाले लोगों का आवेदन स्वीकार होने के बाद वो लोग स्थानीय थाना पुलिस के साथ सेवाएं दे सकते है। पुलिस मित्र में पुलिस से जुडकऱ कोई भी समाज की बुरी नीतियों व समाज सुधारक व समाज के कल्याण में व रैली-मेलों आदि ऐसी स्थिति में पुलिस का सहयोग कर सकते हैं

आप भी बन सकते हैं पुलिस के मित्र
पुलिस मित्र बनने के लिए राजस्थान पुलिस की वेबसाइट www.police. rajasthan.gov.in पर दिए लिंक को खोलने पर एक प्रफोर्मा खुलेगा। जिसमें सम्पूर्ण जानकारी करने के बाद सबमिट करना होगा। उसके बाद पुलिस आपके आवेदन का सत्यापन करेगी। आपका आवेदन स्वीकार होने पर सूचना पहुंच जाएगी।

जागरूक व समझदार लोगों को जोडऩे का प्रयास
पुलिस मित्र योजना में जागरूक लोगों को पुलिस से जोड़ा जा रहा है, ताकि अपराधियों पर अंकुश लगा सकें एवं बड़े अपराध होने से पहले ही उन पर रोकथाम लगाई जा सके। हमारा प्रयास है कि सेवानिवृत्त सैनिक एवं कर्मचारियों को इसमें ज्यादा से ज्यादा जोड़ें, ताकि वे पुलिस के मित्र की भूमिका बखूबी निभा सके।
- डॉ. विकास पाठक, पुलिस अधीक्षक, नागौर