
नागौर. उच्च शिक्षा में नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू किए हुए दो साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक गाड़ी पटरी पर नहीं आई है। नई शिक्षा नीति के तहत कॉलेज शिक्षा में सेमेस्टर व्यवस्था की गई, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी न तो समय पर परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं और न ही शिक्षण व्यवस्था पटरी पर है।
गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति 2020 भारत सरकार की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में किया गया एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इसका उद्देश्य शिक्षा को और अधिक समावेशी, गुणवत्तापूर्ण और छात्रों के लिए उपयोगी बनाना है, लेकिन फिलहाल यह नीति छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण और उपयोगी होने की बजाए दुविधा बनी हुई है। पहले जहां स्नातक की डिग्री तीन साल में पूरी होती थी और हर साल फरवरी-मार्च में परीक्षा के बाद जून-जुलाई में परिणाम जारी करके अगली कक्षा के आवेदन भरवाने के बाद अगस्त तक नए सत्र की पढ़ाई शुरू हो जाती थी, लेकिन जब से नई शिक्षा नीति लागू की गई है, तब से एक साल में एक सेमेस्टर ही पूरा नहीं हो रहा है।
विद्यार्थी असमंजस में, क्या पढ़ें और क्या नहीं
स्नातक की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी असमंजस की स्थिति में हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने तृतीय और पांचवे सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू करवा दी है, जबकि अभी दूसरे व चौथे सेमेस्टर की परीक्षा ही नहीं हुई है। ऐसे में छात्रों के लिए यह दुविधा है कि वे दूसरे व चौथे सेमेस्टर की पढ़ाई करें या फिर तीसरे व पांचवें सेमेस्टर की कक्षाएं अटेंड करें। गौरतलब है कि अभी तक बीए प्रथम वर्ष प्रथम सेमेस्टर का परिणाम ही जारी नहीं किया गया है, जबकि छात्रों को द्वितीय व चौथे सेमेस्टर की परीक्षा के बिना क्रमश: तीसरे व पांचवे सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया गया है।
दूसरे और चौथे सेमेस्टर के परीक्षा आवेदन ही नहीं भरे
कॉलेज शिक्षा में वर्ष 2023 से नई शिक्षा नीति लागू की गई। वर्ष 2023 में कॉलेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का अब तक चौथा सेमेस्टर तथा वर्ष 2024 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का अब तक दूसरा सेमेस्टर पूरा हो जाना था, यानी परीक्षा के बाद परिणाम जारी होना था, लेकिन स्थिति यह है कि दूसरे और चौथे सेमेस्टर वाले विद्यार्थियों के अभी परीक्षा आवेदन ही नहीं भरवाए गए हैं। यदि आज से आवेदन भरवाना शुरू भी करें तो सितम्बर तक परीक्षाएं शुरू हो पाएंगी। ऐसे में यह प्रक्रिया करीब छह महीने देरी से चल रही है।
छात्र हितों पर कुठाराघात
सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करते समय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अधिक समावेशी बताया था, लेकिन परिणाम एकदम विपरीत है। पहले जहां छात्रों को स्नातक के लिए परीक्षा की तीन बार फीस भरनी होती थी, वहां छह बार फीस वसूली जा रही है। इसके साथ किसी भी पेपर में बैक आने पर छात्र पुनर्मूल्यांकन भी नहीं करवा सकते। जब बैक वाले पेपर की परीक्षा दुबारा दी जाती है तो छात्र से फीस भी कहीं अधिक वसूली जाती है, यह छात्र हितों पर कुठाराघात है।
- महिपाल ग्वाला, छात्र नेता, मिर्धा कॉलेज
केवल फीस वसूली न रहे उद्देश्य
नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर व्यवस्था होने से विद्यार्थियों से हर सेमेस्टर के लिए परीक्षा फीस वसूली जा रही है, जबकि सरकार न तो समय पर परीक्षा करवा पा रही है और न ही शिक्षण व्यवस्था पटरी पर है। सरकार का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों से फीस वसूली न होकर समय पर परीक्षा करवाना और सुचारू शिक्षण कार्य करवाना भी होना चाहिए।
- हनुमान बांगड़ा, कार्यकारी जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
परीक्षा केन्द्र बनकर रह गए कॉलेज
नई शिक्षा नीति को लागू करने का उद्देश्य बच्चों को लगातार ?शिक्षण व्यवस्था से जोड़े रखना था, लेकिन सरकारी उदासीनता एवं अज्ञानता के कारण पूरी ?शिक्षण व्यवस्था चौपट हो रही है। सालभर परीक्षा आवेदन भरने व परीक्षा आयोजित करवाई जा रही है, इससे सरकारी कॉलेज केवल परीक्षा करवाने के सेंटर बनकर रह गए हैं। न तो समय पर परीक्षाएं आयोजित करवा पा रहे हैं और न ही ?शिक्षण कार्य हो रहा है। शैक्षिक स्टाफ कागजी कार्रवाई में लगा हुआ है। सरकार को चाहिए कि हर छह माह में समय-समय पर सेमेस्टर वार परीक्षाएं आयोजित करवाएं और ?मुख्य फोकस शिक्षण कार्य पर हो, न कि दूसरे कामों पर।
- डॉ. शंकरलाल जाखड़, पूर्व प्राचार्य, बीआर मिर्धा राजकीय महाविद्यालय, नागौर
Updated on:
08 Aug 2025 11:55 am
Published on:
08 Aug 2025 11:54 am
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