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अधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डाली हवाई पट्टी विस्तार की फाइल, जानिए, नागौर में क्यों जरूरी है हवाई अड्डा

पिछले छह सालों से लम्बित है हवाई पट्टी विस्तार की योजना- व्यापारिक एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है नागौर जिला मुख्यालय

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नागौर. नागौर जिला मुख्यालय पर हवाई पट्टी का विस्तार कर रनवे ग्रेड-4 में अपग्रेड करने की योजना की फाइल अधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डाल दी है। यही वजह है कि पिछले छह साल से नागौर में हवाई जहाज उड़ाने के केवल हवाई सपने ही दिखाए जा रहे हैं। हवाई पट्टी के विस्तार के कार्य की गति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दो साल से जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा नहीं हो पाया है, जबकि अधिग्रहण के लिए जमीन का चिह्नीकरण हो चुका है। विभागीय अधिकारियों क ढुलमुल रवैये एवं स्थानीय मांग को देखते हुए नागौर विधायक मोहनराम चौधरी ने केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र भी लिखा है।

राजे के समय हुए थे प्रयास
गौरतलब है कि राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में नागौर जिले के प्रवासियों की मांग पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने नागौर प्रवास पर स्वयं हवाई पट्टी का निरीक्षण किया व हवाई पट्टी के विस्तार के लिए अधिकारियों को तुरन्त प्रस्ताव तैयार कर भेजने के निर्देश दिए थे। आदेश की पालना में जमीन अधिग्रहण का कार्य आरम्भ कर दिया गया, इसके लिए 1139.51 लाख रुपए के बजट की स्वीकृति जारी की गई थी, लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं आने के कारण जमीन अधिग्रहण का कार्य पूर्ण नहीं हो सका। इसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राजस्थान के नागौर, झुंझुनूं, फलौदी सहित 19 शहरों को विमान सेवा से जोडऩे की योजना भी राजस्थान की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बनाई गई। नागरिक मंत्रालय द्वारा नवम्बर 2016 में विज्ञप्ति जारी कर 5 दिसम्बर 2016 तक विमान कंपनियों से क्षेत्रीय संपर्क योजना के अंतर्गत आवेदन मांगे थे, जिससे 500 किमी की दूरी तक 9 से 18 सीटर विमान सेवा से जोडऩे की योजना थी, लेकिन सरकार बदलने के कारण इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। यदि नागौर की वर्तमान हवाई पट्टी का विस्तार हो जाता है तो यहां पर छोटे विमान उतरने में आसानी होगी व नागौर जिले के प्रवासियों को इसका लाभ मिलेगा।

नागौर में हवाई अड्डा बनाने के ये हैं मजबूत कारण

यूं होना है विस्ताार
नागौर हवाई पट्टी की वर्तमान लंबाई 1500 मीटर है, जिसे पांच सौ मीटर बढ़ाकर 2000 मीटर किया जाना है। साथ ही हवाई पट्टी की चौड़ाई 30 मीटर से बढ़ाकर 45 मीटर किया जाना प्रस्तावित है। राजस्थान राज्य के मध्यवर्ती क्षेत्र में होने से नागौर की भौगोलिक, परिवहन व सुरक्षा की दृष्टि से महत्ती भूमिका है। नागौर हवाई पट्टी के चारों तरफ चारदीवारी निर्माण भी प्रस्तावित है, जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जा चुकी है।

पत्रिका लगातार उठा रही है मुद्दा
नागौर हवाई पट्टी को रनवे ग्रेड-4 में अपग्रेड करने का काम पिछले काफी समय से रूका हुआ है। इसको लेकर राजस्थान पत्रिका द्वारा समय-समय पर समाचार प्रकाशित कर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है।

नागौर को हवाई सेवा से जोडऩा जरूरी
नागौर जिले के हजारों लोग अन्य राज्यों में व्यापार व अन्य कार्य के लिए निवास करते हैं। नागौर के आसपास कोई भी बड़ा हवाई अड्डा नहीं होने से हवाई यात्रा के लिए जयपुर से यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय की बर्बादी के साथ आर्थिक नुकसान भी होता है। इसको देखते हुए नागौर में हवाई पट्टी का विस्तार कर इसे हवाई अड्डा बनाने व नियमित हवाई सेवा चालू करने के लिए मैंने दो दिन पहले ही केन्द्रीय उड्डयन मंत्री को पत्र लिखा है।
- मोहनराम चौधरी, विधायक, नागौर