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VIDEO…शारदीय नवरात्रि पर आज घट स्थापना के के साथ गूंजेंगे देवी मंत्रों के स्वर

Nagaur. शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है। इसकेा लेकर देवी मंदिरों में रविवार को देर शाम तक तैयारियां चलती रही। मंदिरों एवं घरों में शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ ही देवी मंत्रों के स्वर आज से गूंजेंगे

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नागौर. सोमवार से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है। इसकेा लेकर देवी मंदिरों में रविवार को देर शाम तक तैयारियां चलती रही। मंदिरों एवं घरों में शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ ही देवी मंत्रों के स्वर आज से गूंजेंगे। शहर के माही दरवाजा स्थित सुस्वाणी माता मंदिर, खांई की गली स्थित लक्ष्मीमाता मंदिर, बाहेतियों की गली स्थित ब्रह्माणी माता मंदिर, पुलिस लाइन स्थित जोगमाया करणी माता मंदिर में नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ विविध धार्मिक कार्यक्रम शुरू होंगे। मानस सत्संग परिवार तत्वावधान में 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक नया दरवाजा स्थित हनुमान मंदिर में दोपहर दो बजे से श्रीरामचरितमानस का संगीतमय सामुहिक नवाह्नपारायण पाठ किया जाएगा। मानस सत्संग परिवार के संयोजक नेमीचंद मित्तल ने बताया कि 26 सितंबर को श्रीगणेश पूजा, घट स्थापना, रामायणजी की पूजा-अर्चना के साथ श्रीरामचरितमानस पाठ का दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक प्रतिदिन सामुहिक पाठ होगा। उन्होंने बताया कि 5 अक्टूबर को सुंदरकांड पाठ के साथ रामचरितमानस पाठ का समारोहपूर्वक समापन होगा। शहर के बाजारों में दुकानों पर पूजन सामग्री खरीदने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। नारियल, चुनरी के साथ ही अर्चन के दौरान प्रयुक्त होने वाले अनाज भी प्यालियों में इस बार सजाकर रखे गए थे। गांधी चौक, रामपोल, सदर बाजार, तहसील चौक के पास बर्तन बाजार आदि में लोगों की चहल-पहल रही।

भवाल माता मंदिर
जिले के भवाल गांव में एक खेजड़ी के पेड़ के नीचे पृथ्वी से स्वयं प्रकट हुईं थी इसके पीछे मिथक है कि इस स्थान पर डाकुओं के एक दल को राजा की फौज ने घेर लिया था। मृत्यु को निकट देख उन्होंने मां को याद किया। माँ ने अपने प्रताप से डाकुओं को भेड़-बकरी के झुंड में बदल दिया। इस प्रकार डाकुओं के प्राण बच गए, और उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया था। यहां पर नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।


दधिमती माता मंदिर
जिले की जायल तहसील में जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में दधिमती माता का मंदिर स्थित है। जनश्रुति है कि प्राचीनकाल में माता ने पगट होने से पूर्व क्षेत्र के ग्वालों को संदेश दिया कि उनके प्रगट होने के दौरान आवाज नहीं होनी चाहिए। इसके बाद माता तीव्र ध्वनि के साथ धरती को फाडकऱ प्रगट होने लगी तो भयानक ध्वनि सुनकर कोलाहल के साथ लोग भागने लगे। इसकी वजह से माता का केवल अग्रभाग यानी कि सिर ही बाहर निकला। यहां पर श्रद्धालू दूरदराज क्षेत्रों से माता के दर्शनों के लिए आते हैं। पूरे वर्ष यूं तो श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि में यहां पर विशेष आयोजन होते हैं।


किनसरिया माता मंदिर
जिले के परबतसर क्षेत्र में इस प्राचीन मंदिर में नवरात्रि पर मेला लगता है। इस मंदिर में दर्शनों के लिए नागौर एवं इसके आसपास के जिलों से लोग आते हैं। दूर-दूर से नवरात्रि के दौरान भक्तों का यहां पहुंचने का क्रम पूरे दिनों तक लगा रहता है।


पांड्य माता मंदिर
डीडवाना के नमक क्षेत्र में इस प्राचीन मंदिर की मान्यता है। यहां पर नवरात्रि के दौरान नौ दिन मेला लगा रहता है। माना जाता है कि यहां पर श्रद्धालू को कभी निराशा नहीं होती। नौ दिनों में वैदिक मंत्रों के स्वर गूंजते रहते हैं।


ब्रह्माणी माता मंदिर
मेड़ता रोड स्थित प्राचीन ब्रह्माणी माता मंदिर है। बताते हैं कि अकबर की फौज का दस्ते के सुबेदार कालेखां ने इस मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर तोडऩा चाहा, लेकिन उसका पैर चिपक गया। तमाम प्रयास विफल होने पर मां से प्रार्थना की तो उसे मुक्त कर दिया गया। नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक यहां मेला लगा रहता है।