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विधिक माप विज्ञान के एक अधिकारी पर दो जिलों के 39 लाख उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी

विधिक माप विज्ञान विभाग कार्यालय के नहीं खुलते ताले, परिसर में में उगी घास

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विधिक माप विज्ञान विभाग कार्यालय के नहीं खुलते ताले, परिसर में में उगी घास

विधिक माप विज्ञान विभाग कार्यालय के नहीं खुलते ताले, परिसर में में उगी घास

नागौर एवं डीडवाना-कुचामन जिले के 35 लाख से अधिक उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी विधिक माप विज्ञान विभाग के एक अधिकारी के भरोसे है। ऐसे में जिला मुख्यालय पर बने कार्यालय के ताले कभी-कभार ही खुल पाते हैं। हालात यह है कि कार्यालय परिसर में घास उग चुकी है और दरवाजों व खिड़कियों के जंग लग गई है।
गौरतलब है कि देश में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए करीब 37 वर्ष पहले वर्ष 1986 में ‘उपभोक्ता संरक्षण कानून’ तो बना दिया, लेकिन आज भी उपभोक्ता जगह-जगह ठगे जा रहे हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं के साथ इस प्रकार की ठगी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला मुख्यालय पर विधिक माप विज्ञान (बाट-माप) विभाग का कार्यालय खोल रखा है, लेकिन स्टाफ के अभाव में यहां ज्यादातर समय ताला ही लगा रहता है। स्थिति यह है कि दूसरों की शिकायतों का समाधान करने वाला यह विभाग खुद पीडि़त है, जिसके कार्यालय की जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है।
नागौर जिले में 35 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं, लेकिन इन उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार ने मात्र एक विधिक माप विज्ञान अधिकारी नियुक्त कर रखा है, जिस पर नागौर व डीडवाना-कुचामन जिले की जिम्मेदारी है। ऐसे में उपभोक्ता चाहकर भी अपनी शिकायत उन्हें नहीं दे सकते। हालांकि अधिकारी का कहना है कि उपभोक्ता अपनी शिकायत ई-मेल या ऑनलाइन कर सकते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि उपभोक्ता ठगे जाते हैं, उनमें बहुत कम इंटरनेट चलाना एवं ई-मेल करना जानते हैं।

कहीं ठंडा करने के नाम पर तो कहीं आठ बजे बाद देने के नाम पर अवैध वसूली
जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानदार दूध, पेय पदार्थ, शराब आदि की एमआरपी से अधिक रेट वसूलते हैं। कई दुकानदार कॉल्ड ड्रिंक, दूध आदि को फ्रीज में ठंडा रखने के नाम पर तो शराब ठेकेदार आठ बजे बाद बेचने के नाम पर एमआरपी से अधिक अवैध वसूली करते हैं। सरस डेयरी के पार्लर पर शहर में ज्यादातर दुकानदार एमआरपी से अधिक रेट यह कहकर लेते हैं कि उन्हें दूध ठंडा रखने के लिए फ्रीज चलाना पड़ता। यही तर्क कोल्ड ड्रिंक बेचने वाले दुकानदारों का रहता है, ठंडे को ठंडा करने के लिए एमआरपी से अधिक रेट लेते हैं, लेकिन जब बिल मांगा जाता है तो मना कर देते हैं। शराब की दुकानों पर बीयर एवं शराब का भी निर्धारित रेट से अधिक दाम वसूला जाता है, लेकिन इसके विरुद्ध न तो बाट-माप विभाग कार्रवाई करता है और न ही आबकारी विभाग।

बिना बिल नहीं कर सकते कार्रवाई
उपभोक्ता जब भी एमआरपी से अधिक मूल्य वसूलने की शिकायत करता है तो उससे बिल मांगा जाता है, जबकि दुकानदार से जब बिल मांगा जाता है तो वे सीधा कह देते हैं कि लेना है तो लो, बिल नहीं है। ऐसे में मजबूर उपभोक्ताओं को अधिक राशि देकर माल खरीदना पड़ता है। हालांकि दुकानदार बिल देने से मना करता है तो उसके खिलाफ वाणिज्य कर विभाग में शिकायत की जा सकती है। लेकिन चार-पांच रुपए के चक्कर में उपभोक्ता इस झंझट में पडऩे से बचता है।

पत्रिका नॉलेज : विधिक माप विज्ञान विभाग का उद्देश्य
विभाग का मुख्य उद्देश्य विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 एवं इसके अंतर्गत बने नियमों का प्रवर्तन सुनिश्चित किया जाना हैं, ताकि राज्य के उपभोक्ताओं को व्यापारिक लेन देन अथवा संरक्षण की दृष्टि से तौलने व मापने के उपकरणों की सत्यता एवं प्रमाणिकता प्रदान की जा सके। राज्य ने राजस्थान विधिक माप विज्ञान कानून प्रवर्तन नियम, 2011 को विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के तहत अधिनियमित किया है, जिसमें वजन और माप उपकरणों के मुद्रांकन और सत्यापन, बिक्री और सेवा आदि के उद्देश्य से वजन और माप के निर्माता, मरम्मतकर्ता व डीलरों की लाइसेंसिंग, लाइसेंस की प्रक्रिया, मुद्रांकन और सत्यापन की प्रासंगिक शर्तें और शुल्क के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश हैं।

एक ही पोस्ट है
विधिक माप विज्ञान विभाग में मेरी एक ही पोस्ट है। ऑफिस भी मैं ही खोलता हूं। पूरे प्रदेश में यही व्यवस्था है। सब जगह एक-एक अधिकारी है। उपभोक्ता को किसी प्रकार की शिकायत होने पर वह ऑनलाइन या हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकता है।
- सुरेश कुमार, निरीक्षक विधिक माप विज्ञान, नागौर