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पांचौड़ी सीएचसी को वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने से सपना बनी बेहतर चिकित्सा सुविधा

-दो साल पहले मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के बाद किया था क्रमोन्नत - पीएचसी की तरहक एक चिकित्सक के भरोसे सामुदायिक चिकित्सालय- इलाज के लिए भटकते रहते हैं ग्रामीण

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पांचौड़ी सीएचसी को वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने से सपना बनी बेहतर चिकित्सा सुविधा

खींवसर। पांचौड़ी में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का भवन।

खींवसर. नागौर जिले के पांचौड़ी कस्बे के अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधा जुटाने के लिए दो साल पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में अस्पताल को सीएचसी में क्रमोन्नत किया था, लेकिन दो साल में वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं होने से चिकित्सा सुविधाएं वहीं अटकी है। बेहतर चिकित्सा सुविधा लोगों के लिए महज सपना बन गई है।
वर्ष 2021 में सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को क्रमोन्नत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का दर्जा दिया था। सीएचसी स्तर की वित्तीय स्वीकृत नहीं देने तथा अपर्याप्त भवन व स्टाफ की कमी के कारण यह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र केवल सरकारी कागजों में ही क्रमोन्नत होकर रह गया है। सुविधा के नाम पर यहां एक डॉक्टर व तीन कम्पाउण्डर ही कार्यरत हैं। जिनके कंधे पर सीएचसी के साथ इसके अधीन आने वाले उप स्वास्थ्य केन्द्र व पीएचसी की जिम्मेदारी भी है।

खास यह सब पद होते भरे

आईपीएचएस की गाईड लाइन के अनुसार सीएचसी के लिए मेडिकल स्टाफ सहित 35 पदों का सृजन किया गया है। इसमें जनरल सर्जन एक, फिजिशियन एक, गायनाकोलोजिस्ट एक, पिडियाट्रिक एक, अनस्थेटिक्स एक, डेन्टल सर्जन एक, जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर पांच, आयुष मेडिकल ऑफिसर एक, स्टाफ नर्स दस, फार्मासिस्ट एक, आयुष फार्मासिस्ट एक, एएनएम एक, लेब टेक्नीशियन दो, रेडियोग्राफर एक, डाईटिशियन एक, ऑपथेलेमिक असिस्टेंट एक, कॉल्ड चैन व वैक्सीन लॉजिस्टिक असिस्टेंट एक, ओटी टैक्नीशियन एक, रिहेबिलिटेशन वर्कर एक व कंसल्टर की एक पोस्ट प्रस्तावित है। यहां इन सभी पदों के कार्य का भार एक डॉक्टर व तीन कम्पाउण्डर के जिम्मे हैं।

इन सुविधाओं के लिए पड़ रहा है भटकना

सामान्यत तौर पर सीएचसी में 30 बेड, एक ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम, एक्स-रे रूम, ईसीजी एण्ड लेबोरेटरी, चौबीस घण्टे आपातकालीन व डिलेवरी सेवाएं, सप्ताह में एक बार नेत्र विशेषज्ञ से संबंधित सेवाएं, गैर संचारी रोग की स्क्रीनिंग, निदान एवं उपचार, 37 तरह की जांच की सेवाएं, नर्सेज रेस्ट रूम जैसी सुविधाएं चौबिसों घण्टे मौजूद रहती है, लेकिन न तो इन सुविधाओं के लिए पर्याप्त भवन है और न ही पर्याप्त बजट, इसके चलते ग्रामीणों को शहरों में जाना पड़ रहा है।

भटक रहे मरीज

पांचौड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अन्तर्गत ग्राम पंचायत आचीणा, माडपुरा, दुजासर, शिवपुरा, बैराथलकला व बैराथल खुर्द, जगरामपुरा के उप स्वास्थ्य केन्द्र है। इसके अलावा पांचौड़ी, तांतवास, दातीणा, करणू, भोमासर, सिंधिपुरा के आस-पास के गांवों से मरीज पहुंच रहे है। यहां रोजाना 100 के करीब ओपीडी है। यहां 1979 में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की सुविधाएं भी पूरी नहीं मिल रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के भवन के लिए गत वर्ष सितम्बर माह में पांच बीघा भूमि का आवंटन किया गया था। वित्तीय स्वीकृति के अभाव में भवन निर्माण नहीं हो पाया है।

नहीं मिली वितिय स्वीकृति

हमारी मांग पर मुख्यमंत्री ने 2020 में अस्पताल क्रमोन्नत किया था। गत वर्ष पांच बीघा भूमि का आवंटन भी करवा दिया, लेकिन वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं करने से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का लाभ क्षेत्रवासियों को नहीं मिल पा रहा है। यहां 20-25 गांवों के मरीज आते हैं साथ ही अस्पताल हाईवे पर स्थित है। यहां पुलिस थाना होने के कारण एमएलसी व पोस्टमार्टम की भी अधिकता रहती है। लम्बे चौड़े क्षेत्र में कोई बड़ा अस्पताल तक नहीं है।

- सुशील कंवर, सरपंच, पांचौड़ी।

सरकार शीघ्र जारी करें बजट
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का भवन नहीं बनने एवं पर्याप्त स्टाफ नहीं लगाने से ग्रामीण भारी परेशान है। सरकार को शीघ्र बजट जारी करना चाहिए, ताकि राहत मिले।
-मदनलाल मेघवाल, ग्रामीण
एक चिकित्सक के भरोसे
सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अस्पताल को क्रमोन्नत तो कर दिया पर लाभ तभी मिल पाएगा जब यहां पर्याप्त मात्रा में चिकित्सक लगे तथा विभिन्न जांचों की व्यवस्था हो।
-अमीरद्दीन मोयला, समाज सेवी
भटक रहे मरीज
सरकार ने जब पांचौड़ी के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को सीएचसी में क्रमोन्नत किया तो ग्रामीणों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा, पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ एवं अपर्याप्त भवन के चलते ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल पाया है।
-शेरसिंह, ग्रामीण