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प्रताप ने देश और संस्कृति की रक्षा के लिए जीवन पर्यंत संघर्ष किया

विभिन्न संगठनों ने महाराणा प्रताप जयंती मनाई, उनके आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प, किया नमन

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'देश व संस्कृति की रक्षा के लिए प्रताप ने आजीवन संघर्ष कियाÓ

'देश व संस्कृति की रक्षा के लिए प्रताप ने आजीवन संघर्ष कियाÓ

नागौर. केशवदास की बगीची में महाराणा प्रताप की 480वीं जयंती मनाई गई। रामद्वारा के महंत जानकीदास महाराज ने महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पमाला एवं दीप प्रज्वलित किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने हिंदू समाज के लिए जो संघर्ष किया वह अनुकरणीय है। महाराणा प्रताप ने हिंदू समाज, देश और भारतीय संस्कृति की रक्षा करने के लिए ऐशो आराम छोड़ कर जंगल में रहना स्वीकार किया था। समाज के अनेक वर्गों को संगठित करने का भी साहसिक कार्य किया। आज हमारे समाज में उनका नाम आदर के साथ लिया जाता है तथा संपूर्ण हिंदू समाज महाराणा प्रताप को कोटि-कोटि नमन करता है। उनके आदर्शों पर चलकर देश और समाज का कार्य करने के लिए कटिबद्ध है। इस अवसर पर संत मांगूदास, कल्याण दास, उमंग राम, लक्ष्मण, मेघुदास, ललित सांखला, मेघराज राव, अफ्रेश मुखर्जी, गंगाराम तेली उपस्थित रहे।

देश के लिए सर्वस्व अर्पित करने का संकल्प
नागौर. लुनदा के राजकीय विद्यालय स्थित क्वारंटीन सेंटर में महाराणा प्रताप जयंती मनाई गई। अध्यापक भवानी सिंह ने बताया कि महाराणा की जीवनी पर प्रकाश डाला। इस दौरान सेंटर में मौजूद अध्यापक दिनेश सिंह ने देश के लिए सर्वस्व अर्पित करने का संकल्प लेने की जरूरत बताई। अध्यापक मंगतराम ने वर्तमान में कोरोना को हराने के लिए एकजुट होकर मजबूती से कार्य करने की बात कही।

कामधेनु सेना ने मनाई महाराणा प्रताप जयन्ती
नागौर. कामधेनु सेना ने सोमवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रवण सैन की अध्यक्षता में महाराणा प्रताप की जयंती मनाई। राष्ट्रीय महासचिव दिपेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि नागौर रिंग रोड स्थित महावीर सिटी में कार्यक्रम हुआ। महाराणा प्रताप के चित्रपट्ट के समक्ष पुष्प अर्पित किए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रवण सैन ने पुष्पमाला पहनाकर व सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए भगवा ध्वज के साथ रैली निकाली। महाराणा प्रताप के बलिदान और शौर्य को याद किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने महाराणा की जीवनी पर प्रकाश डाला। इस मौके पर पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रवणराम बिश्नोई, तहसील महासचिव डूंगर राड़, दीपचन्द सांखला, मुकेश सागर, भागाराम जाट, विष्णु जांगिड़, तेजप्रीत, रोहिताश सुथार, प्रकाश राव, आशाराम सियोल, दिनेश रावल, नरपत बेनीवाल, लिलाधर लखारा समेत कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।