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बीमा कम्पनी ने कर दिया ‘भामाशाह’ का ‘इलाज’, जानिए, क्या है पूरा मामला

- निजी अस्पतालों का क्लेम अटकने से भामाशाह योजना में बंद हो गया नि:शुल्क उपचार- प्रदेश के कुछेक अस्पतालों को छोडकऱ ज्यादातर निजी अस्पताल संचालकों ने बंद कर दिया उपचार - अकेले नागौर जिले में भामाशाह योजना के करोड़ों बकाया- राज्य सरकार की उदासीनता से आयुष्मान भारत- महात्मा गांधी राष्ट्रीय राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना का मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ

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Bhamashah Scheme

भामाशाह योजना

नागौर. जरूरतमंद एवं गरीबों को निजी अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई भामाशाह योजना में उपचार करने वाले निजी अस्पतालों को बीमा कम्पनी द्वारा क्लेम भुगतान नहीं करने से योजना ही बंद हो गई है। हालांकि 22 महीने पहले प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद गहलोत सरकार ने केन्द्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को मिलाकर नई ‘आयुष्मान भारत - महात्मा गांधी राष्ट्रीय राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना’ (भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का परिवर्तित रूप) शुरू कर दी, लेकिन इस योजना में भी लोगों को काफी महीनों से नि:शुल्क उपचार की सुविधा नहीं मिल रही है। एक प्रकार से बीमा कम्पनी ने निजी अस्पतालों का भुगतान रोककर योजना का गला घोंटने का काम किया है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जीवाड़ा करने वालों का भुगतान रोकते तो ठीक था, लेकिन सभी अस्पतालों का भुगतान रोकना उचित नहीं है।

जिले में 38 अस्पतलों में होता था नि:शुल्क उपचार
भामाशाह योजना के तहत नागौर जिले के 38 निजी अस्पताल जुड़े हुए थे, जिनमें पात्र मरीजों का नि:शुल्क उपचार होता था। वसुंधरा सरकार के समय बीमा कम्पनी द्वारा समय-समय पर भुगतान किया जा रहा था, लेकिन सरकार बदलने के बाद भुगतान रोक दिया गया। करीब साल तक चले घटनाक्रम के बाद 13 दिसम्बर 2019 बीमा कम्पनी का सरकार के साथ किया गया एमओयू समाप्त हो गया। उसके बाद से निजी अस्पतालों का भुगतान अटका हुआ है। हालांकि सरकार भुगतान करने की बात कह रही है, लेकिन अस्पताल संचालकों का कहना है कि एक साल से अधिक समय हो गया, अब तक एक पैसा भी नहीं मिला है। जिले भर के अस्पतालों का बकाया करोड़ों में है। यही स्थिति पूरे प्रदेश की है।

उठानी पड़ रही है परेशानी
जिले में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत उपचार नहीं किया जा रहा है, जबकि जयपुर के निजी अस्पताल में नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। मेरी भाभी के डायलिसिस होती है, जो हमें जयपुर करानी पड़ती है। यदि जिले में नि:शुल्क हो जाए तो हमें परेशानी से काफी राहत मिल सकती है।
- वसीम, मरीज के परिजन, कुचामन सिटी

क्लेम अटका दिया, उपचार कैसे करें
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में निजी अस्पतालों के करोड़ों रुपए बीमा कम्पनी ने अटका दिए, जिसको लेकर एसोसिएशन ने कई बार सरकार को लिखा, लेकिन एक साल से अधिक समय होने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। एक तो मार्जिन ही कम कर दिया और ऊपर से भुगतान भी नहीं कर रहे, ऐसे में नि:शुल्क उपचार कैसे करें। यही कारण है कि प्रदेश में अधिकतर निजी अस्पताल संचालकों ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में नि:शुल्क उपचार करना बंद कर दिया।
- डॉ. रणवीर चौधरी, सचिव, आईएमए, नागौर

छह अस्पतालों ने किया है आवेदन
भामाशाह योजना के स्थान पर सरकार ने आयुष्मान भारत - महात्मा गांधी राष्ट्रीय राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना चलाई है, जिसमें जिले से अब तक मात्र छह निजी अस्पताल संचालकों ने ही रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। जिनमें से पांच का निरीक्षण कर फाइल जयपुर मुख्यालय भेजी है। नई योजना में जयपुर स्तर पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। जहां तक बकाया भुगतान की बात है तो सरकार द्वारा धीरे-धीरे भुगतान किया जा रहा है। साथ ही निजी अस्पताल संचालकों की यूनियन की मांगों पर भी निर्णय होना है।
- डॉ. शीशराम चौधरी, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत - महात्मा गांधी राष्ट्रीय राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना (भामाशाह योजना), नागौर