
नागौर. जोधपुर तिराहे पर बना कुरजां होटल भवन। होटल के कमरे में स्मैक पीने वालों ने बिखेरे माचिस व कस लगाने के पेपर।कुरजां होटल की छत पर उगी घास।
Nagaur News: जिला मुख्यालय पर 28 साल पहले पर्यटकों को ठहराने के लिए बनाई गई ‘कुरजां’ होटल में इन दिनों स्मैकची ‘कस’ लगा रहे हैं। देखरेख के अभाव में लोग होटल भवन के दरवाजे, खिड़कियां व कमरों का फर्नीचर आदि तोडकऱ ले गए। अब यहां मवेशियों के साथ नशेडि़यों ने अपना डेरा बना लिया है। होटल भवन में बिखरी माचिस की डिब्बियां व स्मैक पीने के लिए काम लिए जाने वाले पेपर के ढेर लगे हुए हैं। शहर के बाहर होने के कारण नशेडिय़ों के लिए यह जगह सुरक्षित भी है और चारों तरफ झाडिय़ां उगने के कारण पुलिस भी इसमें झांककर नहीं देखती।
गौरतलब है कि 26 जनवरी 1996 को राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) के तत्कालीन अध्यक्ष गजसिंह ने नागौर की प्रमुख लोकेशन जोधपुर बायपास तिराहे पर पर्यटक विश्राम गृह ‘कुरजां’ का उद्घाटन किया था। शुरू में इस होटल का संचालन बेहतर तरीके से किया, लेकिन बाद में निगम की लापरवाही व उदासीनता के कारण इसकी दुर्दशा होने लगी और आखिर में इसको बंद करना पड़ा। होटल को बंद करने के बाद निगम ने भवन को सूना छोड़ दिया। उसके परिणामस्वरूप आज यह हालात है।
करोड़ोंं रुपए से बना कुरजां होटल का भवन पिछले करीब 20 साल से धूल फांक रहा है। कमरों में जहां पर्यटक ठहरने चाहिए, वहां पक्षियों ने घोंसले बना लिए और मवेशी बैठे रहते हैं। अब तो यहां स्मैकची भी डेरा डाले रहते हैं। इसके कारण नागौर आने वाले पर्यटकों को मजबूरीवश महंगे निजी होटलों में रुकना पड़ता है। यदि कुरजां होटल संचालित किया जाए तो अहिछत्रगढ़ किला, तारकीन दरगाह, जैन मंदिर, सांईजी का टांका, वीर तेजाजी मंदिर खरनाल आदि स्थानों पर आने वाले पर्यटकों को यहां ठहरने की सुविधा मिल सकती है, साथ ही स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
गौरतलब है कि प्रदेश में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने एवं प्राचीन व ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आरटीडीसी काम करता है। देश का राजस्थान पहला ऐसा राज्य है, जिसने 4 मार्च 1989 को पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया था, लेकिन आरटीडीसी पिछले कई वर्षों में नागौर में कोई भी उल्लेखनीय काम नहीं कर पाया है। जबकि जिले में पर्यटन स्थलों की कमी नहीं है, यदि आरटीडीसी जिले के पर्यटन स्थलों का पर्याप्त एवं समय पर प्रचार एवं संरक्षण करे तो पर्यटन उद्योग को पंख लग सकते हैं।
जिले में पर्यटन स्थलों की कमी नहीं है। जिला मुख्यालय पर अहिछत्रगढ़ दुर्ग सहित वीर अमरसिंह की छतरियां, सूफी हमीदुद्दीन की दरगाह, बुलंद दरवाजा, अमरसिंह का पैनोरमा, बंशीवाला मंदिर, बड़ली स्थित नाथ जी छतरी, प्रमुख तालाब, ऐतिहासिक सात दरवाजे, खरनाल का वीर तेजाजी मंदिर, खींवसर फोर्ट, कुचामन फोर्ट, मेड़ता का मीरा मंदिर, नावां की नमक की झीलें, डीडवाना की झील, लाडनूं के जैन मंदिर, गोठ मांगलोद का दधिमति माता मंदिर, भंवाल माता मंदिर सहित कई ऐसे मंदिर एवं प्राचीन स्थल हैं, जिनको पर्यटन के मानचित्र पर उभारा जा सकता है।
आरटीडीसी के पर्यटक विश्राम गृह कुरजां को संचालित करने के लिए सरकार के स्तर पर काम चल रहा है, जल्द ही इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
- डॉ. मंजू बाघमार, राज्य मंत्री, राजस्थान सरकार
Published on:
15 Mar 2024 12:32 pm
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