
Registration closed in two hours, warnings of flare-up farmers' organi
नागौर. जिले में गत चार अक्टूबर की शाम से बंद हुए मूंग का समर्थन मूल्य पर बेचान का पंजीकरण सोमवार को पुन: शुरू होने के दो घंटे बाद बंद हो गया। लगातार दो दिनों तक राजस्थान पत्रिका की ओर से पंजीकरण नहीं होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाने के बाद हरकत में आए जिम्मेदारों ने पंजीकरण तो चालू कराया, लेकिन बाद में बंद होने के कारण हजारों किसान फिर पंजीकरण कराने से वंचित रह गए। इससे भडक़े विभिन्न किसान संगठनों ने जहां सडक़ों पर उतरने की चेतावनी दे डाली है, वहीं विधायक हनुमान बेनीवाल ने भी किसानों के समर्थन में आंदोलन के लिए चेता दिया है।
जिले में सोमवार को समर्थन मूल्य पर पंजीकरण सुबह करीब दस बजे से शुरू हुआ। केवल दो घंटे में पांच हजार किसानों का पंजीकरण हुआ। इसके बाद पंजीकरण बंद हो गया। इससे ईमित्रों पर आए किसानों को मायूसी हुई, हालांकि पंजीकरण होने की आस में काश्तकार घंटों ईमित्रों में डेरा डाले रहे। पंजीकरण बंद होने की वजह से फिर से हजारों किसान मूंग बेचान का पंजीकरण कराने से वंचित रह गए। इससे किसानों में उठे असंतोष के स्वर अब आंदोलन के रूप में बदलते नजर आने लगे हैं। किसान संगठनों ने चेताया है कि किसानों के साथ पंजीकरण के नाम पर किया जा रहा मजाक नहीं चलेगा। पंजीकरण जल्द ही शुरू नहीं हुए तो फिर सडक़ों पर उतरकर किसानों की शक्ति का एहसास कराने का एलान किया है। विधायक हनुमान बेनीवाल ने भी चेताया कि मूंग का पंजीकरण नहीं होने पर वह किसानों के समर्थन में सडक़ पर उतरेंगे।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
समर्थन मूल्य पर मूंग बेचान का पंजीकरण बंद होने पर भडक़े किसानों की समस्या का मुद्दा राजस्थान पत्रिका ने लगातार दो दिनों तक प्रकाशित खबरों में प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद नींद से जागे जिम्मेदारों ने पंजीकरण बंद होने के बाद दस दिन पुन: इसे शुरू कराया। पंजीकरण शुरू होने की जानकारी मिलने पर ईमित्र संचालकों के यहां काश्तकारों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान पंजीकरण बंद होने के बाद भी काश्तकार कई घंटे तक ईमित्रों पर डटे रहे कि शायद कोई तकनीकी खामी आ गई हो, हो सकता है कि फिर से शुरू हो जाए। काफी देर इंतजार के बाद भी पंजीकरण नहीं होने पर सरकार को कोसते हुए किसान लौटे, लेकिन थोड़ी देर बाद भी किसान संगठनों, ग्रामीणों के ज्ञापन देने के साथ आंदोलन के चेतावनी की जानकारियां भी आने लगी। कहा जा रहा है कि स्थिति में सुधार नहीं होने पर फिर हालात और ज्यादा बिगड़ेंगे।
यह भी हो रही मुश्किल
समर्थन मूल्य पर मूंग बेचान के लिए केवल एक का पंजीकरण होने से भी स्थिति विकट हो गई है। काश्तकारों का कहना है है कि ईमित्रों में पंजीकरण भामाशाह कार्ड के जरिए होता है। कार्ड महिला के नाम होता है, लेकिन जमीन उसके पति या लडक़े नाम होती है। ऐसे में पंजीकरण भी महिला के नाम पर ही कर दिया जाता है। बेचान के लिए खरीद केन्द्रों में जाने पर कह दिया जाता है कि गिरदावरी के नाम पर पंजीकृत की ही मूंग खरीदी जाएगी। इससे किसानों के समक्ष संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई परिवारों में भामाशाह कार्ड से केवल एक पंजीकरण होगा तो फिर उसी परिवारों के दो लोगों के नाम जमीन है तो फिर वह कैसे अपनी मूंग बेचेगा। उसका तो पंजीकरण ही नहीं किया जा रहा है।
जिला कलक्टर को ज्ञापन, दी चेतावनी
समर्थन मूल्य पंजीकरण में गिरावरी के नाम से होने की शर्त पर भडक़े किसानों ने जगबीर छाबा के नेतृत्व में ज्ञापन जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि खातेदारी के खेत में एक से अधिक खातेदारों के नाम अलग होने के साथ उनके भामाशाह कार्ड भी हैं। इस स्थिति में टोकन कटने में दिक्कतें आ रही है। इनका अलग-अलग पंजीकरण करना चाहिए। इसको गत वर्ष की भाति सुव्यवस्थित किए जाने की मांग की गई। ज्ञापन दिए जाने के दौरान राजूराम, महिपाल, धन्नाराम, कालू एवं मनीष आदि काश्तकार मौजूद थे।

Published on:
16 Oct 2018 11:54 am
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
