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नागौर की फसलों का अनुसंधान हो रहा जोधपुर में, थोप दिया सीकर, नागौर की कृषि को हो रहा नुकसान

कृषि प्रधान नागौर जिले के किसानों की पीड़ा, पिछले काफी समय से नागौर जिले का कृषि संभाग बना रखा है सीकर, जबकि सीकर में नहीं होता नागौर में उगाई जाने वाली फसलों का अनुसंधान, नागौर की जलवायु व मृदा भी जोधपुर से मिली-जुलती, सीकर की दूरी भी ज्यादा

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नागौर. नागौर जिले की जलदायु, मिट्टी एवं मौसमी परिस्थितियां जोधपुर जिले से मिलती-जुलती है। यही वजह है कि नागौर में उगाई जाने वाली ज्यादातर फसलें जोधपुर में भी उगाई जाती हैं। नागौर की प्रमुख फसलों का अनुसंधान जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय व काजरी में किया जाता है, इसके बावजूद नागौर जिले को सीकर खंड (कृषि संभाग) में शामिल कर रखा है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। पूर्व के एक कृषि मंत्री की हठधर्मिता से किए गए इस निर्णय का खमियाजा नागौर जिले के किसान एवं विभागीय अधिकारी उठा रहे हैं। ऐसे में अब नागौर जिले को दुबारा जोधपुर कृषि संभाग में शामिल करने की मांग उठने लगी है। गौरतलब है कि पहले नागौर जिला जोधपुर कृषि संभाग में शामिल था, जहां जीरा, ईसबगोल, मूंग, पान मैथी, कपास आदि फसलों पर अनुसंधान किया जाता है और ये सभी फसलें नागौर जिले की प्रमुख फसलें हैं। जोधपुर कृषि संभाग में बीज की किस्में, रोग, कीट के उपचार, तकनीकी विधियों से बुआई, गुणवत्ता पर अनुसंधान किया जाता है। जबकि इसके विपरीत सीकर खंड में इन फसलों का अनुसंधान नहीं होता है।

यह है व्यवस्था
कृषि जलवायु के आधार पर प्रदेश में 10 खंड बना रखे हैं। सीकर खंड 2ए श्रेणी में आता है, जिसमें सीकर, झुंझुनूं व नागौर जिला तथा नए जिलों में नीम का थाना व डीडवाना-कुचामन शामिल हैं। जबकि नागौर और सीकर की जलवायु एवं मिट्टी में रात-दिन का अंतर है।

नागौर की प्रमुख फसलें
नागौर जिले में खरीफ के सीजन में मुख्य रूप से मूंग, मोठ, बाजरा, कपास, तिल आदि फसलें प्रमुख से बोई जाती है। नागौर जिले में खरीफ बुआई का रकबा करीब 8 लाख हैक्टेयर है। रबी के सीजन में जीरा, ईसबगोल, गेहूं, सरसों, तारामीरा व चना प्रमुख फसलें हैं। मसाला फसलों में देखें तो पान मैथी, सिंधीसुआ आदि शामिल हैं। जिले में रबी बुआई का रकबा करीब ढाई लाख हैक्टेयर है।

यह भी बड़े कारण
- नागौर से सीकर की दूरी - 180 किमी
- नाौर से जोधपुर की दूरी - 115 किमी

  • नागौर से सीकर आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन के साधन जोधपुर की अपेक्षा आधे भी नहीं।
  • नागौर का कृषि महाविद्यालय, कृषि अनुसंधान उप केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र अठियासन जोधपुर विश्वविद्यालय के अधीन हैं।

जोधपुर में हो नागौर की फसलों का अनुसंधान
नागौर कृषि प्रधान जिला है और यहां उगाई जाने वाली फसलों की गुणवत्ता अपने आप में विशिष्ट है। यहां का जीरा, पान मैथी, ईसबगोल आदि की विश्व भर में विशेष मांग है, यही वजह है कि यहां एमडीएच, कैच जैसी बड़ी-बड़ी कम्पनियों ने अपने प्लांट लगाए हैं। सरकार को भी इसको ध्यान में रखते हुए नागौर को जोधपुर जोन में रखना चाहिए, न कि सीकर में।
- अशोक जागूं, प्रगतिशील किसान, कालड़ी