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बैंक की बदमाशी पर उपभोक्ता आयोग का हथौड़ा : एसबीआई व बीमा कम्पनी ने 30 लाख की बजाए 5 लाख दिए, अब ब्याज सहित 32 लाख रुपए देने होंगे

एसबीआई व बीमा कम्पनी का माना सेवा दोष, बीमा क्लेम राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नागौर ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

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Court Order

प्रतीकात्मक फोटो

नागौर. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नागौर ने बीमा क्लेम से जुड़े प्रकरण में फैसला देते हुए बीमा क्लेम राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ शारीरिक व मानसिक क्षतिपूर्ति के एक लाख व परिवाद व्यय के 7 हजार रुपए अदा करने के आदेश दिए। साथ ही आयोग ने बैंक की ओर से मास्टर बीमा पॉलिसी की प्रति जिला आयोग को उपलब्ध नहीं कराने पर एक लाख रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष पेटे एक माह के भीतर जमा कराने के आदेश भी दिए।

जानकारी के अनुसार शहर के बस्सी मोहल्ला निवासी मृतक लक्ष्मणसिंह की पत्नी संजू देवी, पुत्र मानवेन्द्र सिंह व अजयसिंह ने अधिवक्ता विक्रम जोशी के माध्यम से 6 दिसम्बर 2021 को उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया। जिसमें बताया कि लक्ष्मणसिंह का एक वेतन खाता भारतीय स्टेट बैंक, शाखा गांधी चौक नागौर में था। बैंक ने अपने बैंकिंग कार्य को बढ़ावा देने उद्देश्य से सरकारी कर्मचारियों के वेतन खाते को बीमित करवाया और इस संबंध में एक बीमा पाॅलिसी की, जिसकी वैधता अवधि 4 जनवरी 20220 से 4 जनवरी 2021 तक होना बताया। बीमा अवधि के दौरान 29 अक्टूबर 2020 को लक्ष्मणसिंह की दुर्घटना के कारण मृत्यु हो गई। इस संबंध में पत्नी व पुत्रों ने आवश्यक सूचना उपलब्ध करवाकर 30 लाख का बीमा क्लेम देने के लिए आवेदन किया, लेकिन 2 सितम्बर 2021 को परिवादियों के खाते में 5 लाख रुपए अंतरित किए गए, जो अपूर्ण और अपर्याप्त धनराशि थी। इस प्रकार बैंक व बीमा कम्पनी ने मनमाने ढंग से अपर्याप्त धनराशि अदा कर सेवा दोष किया।

आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद संजू देवी व उसके पुत्रों के परिवाद को एसबीआई बैंक व युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी के खिलाफ आंशिक रूप से स्वीकार कर आदेश दिया कि एक माह के भीतर अप्रार्थी संयुक्त रूप से या पृथक-पृथक रूप से शेष क्लेम दावा राशि 25 लाख रुपए एवं सेवा दोष से पहुंची शारीरिक व मानसिक क्षतिपूर्ति के एक लाख रुपए व परिवाद व्यय के 7 हजार रुपए मिलाकर कुल 26.07 लाख रुपए परिवाद पेश करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज सहित अदा करे। इसके साथ बैंक की ओर से मास्टर बीमा पॉलिसी की प्रति जिला आयोग के चाहने पर भी पेश नहीं कर सही तथ्यों को छिपाने का अनुचित तरीको अपनाने के विरुद्ध एक लाख रुपए राज्य हित में राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष पेटे एक माह के भीतर जमा कराने का आदेश दिया है।