
State government reduced rebate on Khadi from 35 to 5 percent
नागौर. राज्य सरकार पिछले एक साल से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जन्मशताब्दी को लेकर विभिन्न कार्यक्रम एवं आयोजन कर गांधीजी के पदचिह्नों पर चलने का दावा कर रही है, लेकिन दो दिन पहले राज्य सरकार द्वारा जारी फरमान से गांधीजी का चरखा चलाने वाली प्रदेश की हजारों कतवारियों एवं बुनकरों पर बेरोजगारी की तलवार लटक गई है। अकेले नागौर में 1500 से अधिक कतवारियां कोरोना काल में आर्थिक संकट की चपेट में आ जाएंगी।
राज्य सरकार के उपक्रम राजस्थान खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड जयपुर के सचिव हरिमोहन मीणा ने 29 सितम्बर को जारी आदेश में बताया है कि राज्य सरकार द्वारा राज्य उत्पादित खादी परिधानों पर 2 अक्टूबर से 31 दिसम्बर 2020 तक 5 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। गौरतलब है कि गत वर्ष राज्य सरकार ने खादी परिधानों पर 35 प्रतिशत छूट दी थी, वहीं भारत सरकार की ओर से खादी ग्रामोद्योग संघों को मार्केटिंग डवलपमेंट असिसटेंट योजनान्तर्गत 15 प्रतिशत छूट देती थी, दोनों मिलाकर कुल छूट 50 प्रतिशत हो जाती थी, जिसके चलते प्रतिस्पर्धा के बाजार में खादी उत्पाद उन परिधानों से कड़ी टक्कर लेते थे, जो मशीनों से निर्मत होने के चलते कम दर पर बाजार में उपलब्ध रहते हैं। लेकिन अब कुल छूट मात्र 20 प्रतिशत (5 प्रतिशत राज्य की व 15 प्रतिशत भारत सरकार की) ही रहने से खादी के उत्पाद आम आदमी के दायरे से बाहर हो जाएंगे और इसका सीधा असर खादी उत्पादों की बिक्री पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में खादी उत्पाद तैयार करने वाली कतवारियां एवं बुनकरों पर रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
छूट का समय भी घटाया
दो साल पहले तक खादी के उत्पादों हर वर्ष दी जाने वाली छूट (रिबेट) 2 अक्टूबर से अगले वर्ष मार्च तक दी जाती थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने गत वर्ष इसे घटाकर 2 अक्टूबर से फरवरी तक किया और इस बार समय में और कटौती करते हुए मात्र 31 दिसम्बर कर दिया है, यानी पहले जहां छह महीने तक खादी उत्पादों पर 50 प्रतिशत छूट मिलती थी, वहां अब मात्र तीन महीने छूट मिलेगी और वो भी 20 प्रतिशत।
बिक्री कम होगी तो उत्पादन कम होगा
नागौर खादी एवं ग्रामोद्योग संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि ऊनी वस्त्रों की बिक्री जनवरी-फरवरी में ही ज्यादा होती है और इन दो महीनों में ही छूट नहीं मिलने से उनका पूरा स्टॉक पड़ा रह जाएगा। दूसरा बिक्री कम होगी तो उत्पादन भी नहीं करवा पाएंगे।
गत वर्ष की रिबेट भी नहीं दी
राज्य सरकार ने गत वर्ष की रिबेट के 35 लाख रुपए में से मात्र 5 लाख का भुगतान किया है, जबकि 30 लाख रुपए अब भी बाकी है। वहीं दूसरी ओर हर साल बिना ब्याज मिलने वाली पंूजी के 20 लाख रुपए भी सरकार ने नागौर खादी एवं ग्रामोद्योग संघ को नहीं दिए हैं, स्वीकृत हो चुके हैं। पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे नागौर संघ के राज्य सरकार 50 लाख रुपए दबाकर बैठ गई, जिसके चलते उत्पादन का कार्य भी बंद है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है खादी संघ किन हालातों का सामना कर रहे हैं।
खादी संघों के प्रति राज्य सरकार का रवैया ठीक नहीं
राज्य सरकार ने दो साल में एक ओर जहां खादी उत्पादों पर दी जाने वाली रिबेट का 35 से 5 प्रतिशत कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ समय भी आधा कर दिया है। पहले कुल छूट 50 प्रतिशत मिलती थी, जिससे खादी उत्पादों की बिक्री अच्छी होती थी और लोगों को रोजगार भी मिलता था, लेकिन अब छूट मात्र 20 प्रतिशत रहने से हमारे लिए खादी उत्पाद बेचना और उत्पादन करना मुश्किल होगा।
- एडवोकेट अर्जुनदास, अध्यक्ष, जिला खादी एवं ग्रामोद्योग संघ, नागौर
Published on:
03 Oct 2020 10:05 am
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