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चुनावी मौसम के पास आते ही शुरू हो गया हड़ताल का सिलसिला, इस विभाग ने भी कर ली तैयारी

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नागौर

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Jyoti Patel

Oct 02, 2018

rajasthan news

चुनावी मौसम के पास आते ही शुरू हो गया हड़ताल का सिलसिला, इस विभाग ने भी कर ली तैयारी

कुचामनसिटी/नागौर. सरकारी कार्मिकों की हड़ताल से आमजन को काफी परशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। सरकारी दफ्तरों में लोगो के काम अटके हुए है, हालत यह है कि लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। फिर भी उनका काम नहीं हो पा रहा है। कभी जवाब मिलता है कि कर्मचारी हड़ताल पर है तो कभी एक-दो दिन बाद आने का जवाब मिलता है। ऐसे में काम होने की आस लगाकर सरकारी कार्यालय जाने वाले आमजन को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। हड़ताल एक विभाग की नहीं है, बल्कि कई विभागों की है। ऐसेे में आमजन को इसका नतीजा भुगतना पड़ रहा है। शायद अभी हड़ताल का सिलसिला थमेगा नहीं क्योंकि 9 अक्टूबर को बैंक कर्मचारियों की ओर से हड़ताल करने की भी बात कही जा रही है। जानकारी के अनुसार रोडवेजकर्मी करीब 16 दिन से हड़ताल पर है। हड़ताल के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें या तो ज्यादा किराया देना पड़ रहा है या फिर निजी वाहनों में बैठकर सफर करना पड़ रहा है।

इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर कार्यरत एएनएम, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर कार्यरत एलएचवी तथा चिकित्सा विभाग के कार्यालयों में कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से सारे काम अटके हुए हैं। कहीं आशा सहयोगिनियों के क्लेम फॉर्म अटके हुए हैं तो कहीं टीकाकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की बैठकें भी प्रभावित हो रही है। आशा सहयोगिनियों को चिकित्सा विभाग का कार्य करने पर प्रोत्साहन राशि मिलती है, लेकिन उनकी यह राशि भी हड़ताल की भेंट चढ़ती ही दिख रही है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, आशा सहयोगिनियों के मानदेय भुगतान में भी देरी हो रही है। जानकारी के अनुसार हड़ताल के चलते पशुपालन विभाग में पशुगणना का कार्य भी प्रभावित होगा। पशु चिकित्सा कार्मिकों के हड़ताल पर चले जाने से 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली 20वीं पशुगणना भी शुरू नहीं हो पाई। इस बार पशुगणना सिर्फ पशुपालन विभाग स्तर पर टेबलेट्स के माध्यम से करवाई जानी है। इसके अलावा करीब 150 पशुचिकित्सा उप केंद्रों पर ताला लटक गए हैं। क्योंकि पशु उपकेन्द्रों का सम्पूर्ण प्रभार पशुधन सहायक व पशुचिकित्सा सहायक के जिम्मे होता है। इनके अवकाश पर चले जाने से इन केन्द्रों पर सेवाएं नहीं मिल पा रही है।