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पश्चिम बंगाल की बेटी ने राजस्थान की बेटियों को बुलन्दियों पर पहुंचाया, देखिए तस्वीरें

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों ने जिम्नास्टिक में बनाई विशेष पहचान, राज्यपाल व मुख्यमंत्री भी कर चुके तारीफ

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मूण्डवा (नागौर). बालिका शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े माने जाने वाले मूण्डवा ब्लॉक की बालिकाएं आज शिक्षा के साथ खेल जगत में अपना परचम लहरा रही हैं। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जनसहयोग से संचालित वीर तेजा महिला शिक्षण एवं शोध संस्थान में अध्ययनरत छात्राओं ने जिम्नास्टिक खेल में देशभर में नागौर जिले के साथ राजस्थान मान बढ़ाया है। राजस्थान की इन बेटियों का खेल कौशल निखारने में पश्चिम बंगाल की निवासी कोच शीला दत्ता का खास योगदान है पश्चिम बंगाल के काकीनाडा में खेल प्रतियोगिताओं के दौरान कानसिंह राठौड़, हनुमानराम कड़वासरा तथा भागीरथ पूनिया ने इनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके कोच समीर राय से सम्पर्क कर तेजास्थली लाए। यहां पूर्व सांसद भंवरसिंह डांगावास व प्रशासिका कमल केसकर ने दत्ता को पारिवारिक माहौल दिया। इससे प्रभावित होकर दत्ता पिछले 22 वर्ष से राजस्थान की बेटियों को खेल जगत की ऊंचाइयों पर पहुंचाने में लगी है। बालिकाओं के खेल कौशल को देख राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे भी इन बेटियों की प्रशंसा कर चुके हैं।

बेटियों ने मोह लिया मन

दत्ता ने बताया कि वर्ष 2003 में तेजास्थली में कोच बनकर आई तो यहां की बेटियों के भोलेपन ने उनका मन मोह लिया है। ग्रामीण परिवेश की लड़कियां जिम्नास्टिक को जन्माष्टमी बोलती थीं। इन बालिकाओं की मासूमियत व अपनेपन में गजब का आकर्षण है। ये पूरे मनोयोग से सुबह-शाम अभ्यास भी करती हैं।

जीते सैकड़ों मैडल

कोच दत्ता की देखरेख में संस्थान की छात्राओं ने अब तक राज्य स्तर पर 678 तथा राष्ट्रीय स्तर पर 74 मैडल विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीते हैं। इनमें से राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में 15 स्वर्ण पदक, 20 रजत पदक तथा 37 कांस्य पदक पदक शामिल हैं। राज्य स्तर पर 492 स्वर्ण पदक, 108 रजत पदक तथा 78 कास्य पदक यहांं की खिलाड़ी छात्राओं ने जीते हैं। जिम्नास्टिक में भाग लेने वाली छात्राओं की संख्या एक हजार से अधिक हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई पहचान

जिम्नास्टिक की तीनों विधाओं आर्टिस्टीक, एक्रोबेटिक तथा तीसरी रिदमिक में संस्थान की तीन सौ अस्सी छात्राएं राष्ट्रीय स्तर पर तथा 270 छात्राएं नेशनल लेवल पर खेल चुकी है।

विदेशों तक राजस्थान का नाम

सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली रविना ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उसे उजबेकिस्तान में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया । जिसमें उसने भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई।

खेलों से स्वावलबंन की राह

संस्थान की पन्द्रह खिलाड़ी छात्राएं शारीरिक शिक्षक बन चुकी है। खेल कोटे से तीन छात्राओं का राजस्थान पुलिस में तथा दो छात्राओं को एलडीसी में भी चयन हुआ है।

जिलास्तर पर सम्मान नहीं

कोच दत्ता के मार्गदर्शन में भले ही सैकड़ों बालिकाओं ने पदक जीते हों। उन्हें सम्मान की मिला हो, पर इन खिलाडि़यों के द्रोणाचार्य को कभी जिला स्तर का सम्मान भी दिया गया, जबकि जिला स्तरीय समारोहों बालिकाओं के करतब शुरू होने पर तालियां गूंजती है।