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लंदन में होगा खो-खो का पहला विश्व कप, आयोजन में नागौर का होगा विशेष योगदान

ग्रामीण खेल खो-खो को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान, इंग्लैंड के खो-खो फेडरेशन के अध्यक्ष हैं नागौर के डॉ. प्रहलाद फरड़ोदा- इंटरनेशनल खो-खो फेडरेशन के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल की डॉ. फरड़ोदा के साथ दिल्ली में हुई बैठक

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The first Kho-Kho World Cup will be held in London

The first Kho-Kho World Cup will be held in London

नागौर. भारतीय खेल खो-खो का पहला विश्व कप इंग्लैंड में आयोजित होगा, जिसमें विश्व के सभी महाद्वीपों की टीमें भाग लेंगी। इसको लेकर शुक्रवार को नई दिल्ली में इंटरनेशनल खो-खो फेडरेशन के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल के साथ खो-खो फेडरेशन ऑफ इंग्लैंड के अध्यक्ष नागौर निवासी डॉ. प्रहलाद फरड़ोदा व इंटरनेशनल खो-खो फेडरेशन के डायरेक्टर ब्रिज हल्दानिया की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यवसायी विक्रांत शर्मा व एनआरआई व पूर्व सरपंच हनुमान फरड़ौदा भी मौजूद रहे। फरड़ौदा ने बताया कि ग्रामीण खेल खो-खो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में यह बड़ा प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार विश्व के करीब 35 देशों में खो-खो की टीमें हैं। विश्व कप आयोजन की तिथि एवं टीमों को लेकर आगामी बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

जानिए, खो-खो खेल को
खो-खो एक भारतीय मैदानी खेल है। इस खेल में मैदान के दोनों ओर दो खम्भों के अतिरिक्त किसी अन्य साधन की जरूरत नहीं पड़ती। खो-खो मैदानी खेलों के सबसे प्राचीनतम रूपों में से एक है, जिसका उद्भव प्रागैतिहासिक भारत में माना जा सकता है। मुख्य रूप से आत्मरक्षा, आक्रमण व प्रत्याक्रमण के कौशल को विकसित करने के लिए इसकी खोज हुई थी। खो-खो का जन्म स्थान पुणे कहा जाता है। यह खेल सरल है और इसमें कोई खतरा नहीं है। पुरुष और महिलाएं दोनों समान रूप से इस खेल को खेल सकते हैं।

खो-खो को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास
खो-खो का खेल भारत के सबसे प्राचीन खेलों में से एक है। यह खेल अब दुनिया भर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। खो-खो के विश्व कप से हम निश्चित करेंगे कि हमारे अपने खेल को दुनिया में प्यार और पहचान मिले।
- डॉ. प्रहलाद फरड़ोदा, अध्यक्ष, खो-खो फेडरेशन ऑफ इंग्लैंड