
स्वच्छ व सुन्दर नागौर
नागौर. स्वच्छता सेवाओं में सुधार के लिए बुनियादी ढांचागत विकास और उनके टिकाउपन, परिणाम, इससे नागरिकों का जुड़ाव तथा जमीनी स्तर पर नजर आने वाले प्रभावों के आधार पर देश के 4041 शहरों और कस्बों की स्वच्छता रैंकिंग के लिए ‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2018’ 4 जनवरी से किया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से देशभर में पहली बार कराए जा रहे इस सर्वेक्षण के तहत सभी शहरों और कस्बों में लगभग 40 करोड़ लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले स्वच्छता के स्तर का मूल्यांकन किया जाएगा और विश्व में इस प्रकार का यह सबसे बड़ा सर्वेक्षण है।
नागरिकों की भागीदारी जरुरी
स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 के अंतर्गत 4041 शहरों और कस्बों को कवर किया जाएगा तथा इसके परिणाम अगले वर्ष मार्च में घोषित किए जाएंगे। इसके लिए अन्य 500 शहरों और कस्बों की राष्ट्रीय रैंकिंग के अलावा 3541 कस्बों, राज्य और क्षेत्रीय रैंकिंग की भी घोषणा की जाएगी। इस सर्वेक्षण के अंतर्गत कुल 4000 अंकों के लिए विभिन्न वेटेज के साथ 71 स्वच्छता संबंधी मानदंडों के आधार पर शहरों की रैंकिंग की जाएगी। सर्वेक्षण में नागौर की बेहतर रेंकिंग के लिए लोगों की भागीदारी जरुरी है।
क्या और किसे हुआ फायदा
केन्द्र की ओर से वर्ष 2016 और 2017 में घोषित सर्वेक्षण के परिणामों से शहरों और नागरिकों में जोश और उत्साह बढऩे के साथ ही सभी हितधारकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिला, जिससे देश के सभी शहरी क्षेत्रों में सर्वेक्षण के दायरे का विस्तार हुआ है। शहर और राज्य सरकारों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की प्रगति के अनुरूप स्वच्छ सर्वेक्षण- 2018 की कार्यविधि और वेटेज में कुछ बदलाव भी किए गए हैं।
जमीनी स्तर पर मिलेंगे परिणाम
जानकारी के अनुसार स्वच्छता की प्रगति का मूल्यांकन करने में नागरिकों की भागीदारी की आवश्यकता को ध्यान रख कर जमीनी स्तर पर परिणाम हासिल किए जाएंगे। 2017 के सर्वेक्षण की तुलना में नागरिकों की प्रतिक्रिया के लिए कुल वेटेज और स्वच्छता पर स्वतंत्र अवलोकन के लिए 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। स्वच्छता के अभिनव तरीकों और समाधानों के लिए शहरों को बढ़ावा देने के वास्ते एक नया मानदंड ‘अभिनव’ शुरू किया गया है, जिसके लिए 5 प्रतिशत वेटेज रखा गया है।
Published on:
01 Jan 2018 05:18 pm
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