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बालवा रोड पर सीवरेज पानी का बना तालाब भूजल का बना रहा जहरीला

Nagaur. सीवरेज के जमा हुए गंदे पानी के कारण इसमें निकलती जहरीली से आसपास का वातावरण हुआ प्रदूषित

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Nagaur news

The pond made of sewerage water on Balwa Road became poisonous of groundwater

-सीवरेज के जमा हुए पानी के रिसकर अंदर धरती में जाने से स्थिति बिगड़ी
-बालवा रोड स्थित पालीटेक्निक कॉलेज के सामने कई दिनों से सीवरेज का जमा पानी बना पर्यावरण के लिए खतरा


नागौर. शहर के बालवा रोड पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के चेंबर्स से लीकेज हुए पानी का तालाब बन गया है। पिछले कई दिनों से जमा हुआ पानी अब न केवल जमीन से रिसकर धरती के अंदर भूजल के साथ पूरी जमीन को जहरीला बनाने में लगा हुआ है, बल्कि इसकी दुर्गन्ध के साथ निकल रही जहरीली गैस पूरे पर्यावरण को निगलने में लगी हुई है। जमाव हुए पानी को नहीं हटाए जाने के कारण पर्यावरण के साथ ही आसपास के भवनों की बुनियाद पर भी यह खतरा बन गया है। उल्लेखनीय है कि सीवरेज चेंबर्स से लीकेज हुए गंदे पानी के जमाव का मुद्दा राजस्थान पत्रिका की ओर से उठाया गया था। इसके बाद सीवरेज चेंबर्स का लीकेज तो दुरुस्त कर दिया गया, लेकिन वहां पर जमा हुए पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया। इसकी वजह से स्थिति विकट होने लगी है।
पालीटेक्निक कॉलेज के सामने स्थित बालवा रोड पर पिछले कई दिनों से जमा सीवरेज का पानी पर्यावरण के लिए खतरा बनता जा रहा है। करीब बीस मीटर से भी ज्यादा जमीन के हिस्से पर फैला यह गंदा दूषित जल रिसकर जमीन के अंदर जाने लगा है। विशेषज्ञों की माने तो इसका जल्द निस्तारण नहीं किया गया तो अंदर जा रहा यह जल नीचे के भूजल को बेकार करने के साथ ही अपने आसपास के भूजल को भी प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह से इस क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति अब बिगड़ती नजर आने लगी है। इसके अंदर जमा हुई गंदगी भी पानी के साथ मिलकर पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रही है।
ऐेसे में इसका समाधान नहीं किए जाने पर स्थिति विकट हो सकती है।


बेपरवाही से बिगड़ी स्थिति
गंदा पानी सीवरेज के जरिये इसके ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचता है। कुछ अर्सा पहले बालवा रोड सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के रास्ते सीवरेज चेंबर्स का पानी लीकेज होने के कारण वहां खाली जमीन पर फैलने लगा। स्थानीय बाशिंदों की माने तो इसकी जानकारी उन लोगों की ओर से ट्रीटमेंट प्लांट के जिम्मेदारों को दी गई थी। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया गया। इसके चलते जमीन के काफी बड़े हिस्से पर यह पानी फैल गया। बताते हैं कि इसके पानी के कारण आसपास स्थित सरकारी प्रतिष्ठानों के भवनों की नींव के अंदर पहुंचकर दीवारों को खोखली करने लगा। यहां पर स्थित अल्पसंख्य छात्रावास की दीवारों में जहां दरारें आ गई थी, वहीं निकट के अन्य भवनों की दीवारें भी गीली रहने लगी है।


बेहद खतरनाक होता है यह सीवरेज का पानी
बताते हैं कि इस प्रकार झाग से भरपूर, मिश्रित, काले, भूरे रंग का जल जो सिंक, शौचालय, लॉन्ड्री आदि से नालियों में जाता है। अपशिष्ट जल बेहद खतरनाक होता है। जमीन के अंदर जाने या फिर इसका जमाव होना भी पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। ऐसे पानी का पीने के पानी की तुलना में तापमान थोड़ा अधिक होता है। ताजा सीवेज का रंग थोड़ा ग्रे होता है, जबकि पुराना सीवेज गहरे भूरे या काले रंग का होता है। ताजा सीवेज की गंध "तैलीय" और अपेक्षाकृत अप्रिय है, जबकि पुराने सीवेज में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस और अन्य अपघटन उप-उत्पादों के कारण एक अप्रिय दुर्गंध होती है। यह प्रत्येक प्रकार से जहरीली होती है।


इनका कहना है...
सीवरेज के चेंबर्स के लीकेज को तो सही करा दिया गया है। इस संबंध में अब तक किसी ने शिकायत तो नहीं की है। फिर भी इसे देखवा लेता हूं।
देवीलाल बोचल्या, आयुक्त नगरपरिषद नागौर