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सत्र बीतने को आया पर सरकारी स्कूलों को न खेल सामग्री मिली और न ही राशि

बड़ा सवाल : पहले समान परीक्ष के प्रश्न पत्र मुख्यालय से छपवाकर अ​धिक पैसे लिए, अब खेल सामग्री खरीदने की तैयारी, सरकार की मंशा पर लग रहे सवालिया निशान

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नागौर. खेल सामग्री के अभाव में मिट्टी के खिलौने बनाते बच्चे।

नागौर.‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। इसलिए शारीरिक विकास के लिए व्यायाम जरूरी है, जो हमें खेलों के माध्यम से प्राप्त होता है।’ खेल ग्रांट से जुड़े दिशा-निर्देशों में लिखी यह बात शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए बेमानी है। क्योंकि शैक्षणिक सत्र बीतने को आया है और स्कूल शिक्षा परिषद ने अब तक खेल सामग्री खरीदने के लिए बजट ही जारी नहीं किया है। अब विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस बार मुख्यालय स्तर पर एक ही टेंडर करके स्कूलों में सीधी खेल सामग्री पहुंचाई जाएगी, जबकि दूसरी ओर संस्था प्रधानों का कहना है कि इस व्यवस्था में खेल सामग्री की गुणवत्ता प्रभावित होगी। गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में हर वर्ष खेल ग्रांट दी जाती है, जिससे संस्था प्रधान आवश्यकता के अनुसार खेल सामग्री की खरीद कर लेते हैं, जबकि ऊपर से आने वाली खेल सामग्री में स्कूल की आवश्यकता को दरकिनार किया जाएगा।

इस प्रकार मिलती है खेल ग्रांट

सरकारी स्कूलों में स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से हर वर्ष कक्षा एक से पांच तक के विद्यालयों को 5 हजार रुपए, कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों को 10 हजार तथा उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए 25 हजार रुपए का बजट दिया जाता है। आमतौर पर यह राशि सितम्बर-अक्टूबर तक जारी कर दी जाती है, लेकिन इस बार मार्च आने के बावजूद न तो बजट दिया गया और न ही खेल सामग्री दी गई है। शैक्षणिक सत्र 2023-24 में अक्टूबर माह में ही राशि हस्तांतरित कर दी थी।

पहले भी लग चुके हैं सवालिया निशान

इससे पहले शिक्षा विभाग ने मुख्यालय स्तर पर समान परीक्षा के प्रश्न-पत्र छपवाए थे, जिसके बदले स्कूलों से अधिक राशि वसूल गई थी, जो काफी चर्चा का विषय रहा। अब खेल सामग्री परिषद स्तर पर खरीद की जा रही है, जिसमें गुणवत्ता के साथ स्कूलों की आवश्यकता का ध्यान रख पाना मुश्किल होगा।

उधारी से चला रहे काम

अब तक स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से स्कूलों को खेल ग्रांट जारी नहीं करने से विद्यालयों में खेल सामग्री क्रय नहीं की जा सकी है। इसके चलते खिलाड़ी विद्यार्थियों को उधार की खेल सामग्री या फिर दानदाताओं से पैसे लेकर काम चलाया गया।

इस बार खेल सामग्री देंगे

इस बार स्कूल शिक्षा परिषद स्तर पर टेंडर करके खेल सामग्री खरीदी गई है, जिसे जल्द ही ब्लॉक स्तर पर सप्लाई किया जाएगा। वहां से फिर स्कूलों को वितरित की जाएगी।

- रामनिवास जांगीड़, एडीपीसी, समसा, नागौर

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