
नागौर. आबकारी विभाग की लॉटरी प्रक्रिया में शामिल होने आई एक महिला आवेदक।
जीतेश रावल
नागौर. आमतौर पर महिलाएं शराब से दूरी बनाए रखती है। यहां तक कि वे अपनी संतान को भी इससे दूर रखने का भरसक प्रयास करती है, लेकिन मालिक बनने में इनको कोई गुरेज नहीं है। जी हां, शराब पीने के शौकीनों में महिलाओं का प्रतिशत भले ही कम हो, लेकिन बेचने में आगे है।
यही कारण रहा कि शराब के ठेके लेने में भी महिलाओं ने काफी उत्साह दिखाया। इसके लिए आबकारी (excise department rajasthan) में भारी मात्रा में आवेदन जमा करवाए गए। लॉटरी पद्धति से किए गए ठेका आवंटन में प्रदेशभर में पैंतीस से चालीस फीसदी ठेके महिलाओं के नाम खुले। यह दीगर बात है कि इन ठेकों का संचालन महिलाओं के हाथ नहीं होगा। हालांकि आबकारी नीति (rajasthan excise policy) में भी स्पष्ट प्रावधान है कि महिलाएं शराब नहीं परोस सकती, लेकिन मालिक बनने से रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में शराब ठेकेदार बन चुकी महिलाओं की जगह उनके नौकर दुकान में बैठकर शराब का बेचान करेंगे। आबकारी बंदोबस्त के तहत हर वर्ष महिलाओं के नाम ठेके आवंटित होते हैं, लेकिन इनका संचालन घर के पुरुष ही करते हैं। चाहे जो हो पर शराब ठेकों से मोटी राशि कमाने के फेर में लोगों ने गृहलक्ष्मी के नाम से आवेदन जमा करवाए और अब ठेका आवंटित होने के बाद गृहलक्ष्मी का ठेका घर में लक्ष्मी लाएगा। नागौर जिले में ही कुल 229 देसी शराब समूहों व भारत निर्मित विदेशी मदिरा की 27 दुकानों में से करीब अस्सी समूह व ग्यारह दुकानों पर महिलाओं ने कब्जा जमाया है। मोटे तौर पर यह आंकड़ा पैंतीस फीसदी तक है।
लक्की मानते हैं इसलिए करते आवेदन
शराब की दुकानों को आमतौर पर पुरुष ही संचालित करते हैं, लेकिन कई दुकानों की मालिक महिला होती है। इसलिए कि कई ठेकेदार अपनी पत्नी या मां को अपने लिए लक्की मानते हैं। ऐसे में उनके नाम से ही आवेदन करते हैं। ऐसे में महिला के नाम से लॉटरी खुल जाती है, लेकिन इन ठेकों का संचालन पुरुष ही करते हैं।
संचालन के लिए निकालते तोड़
आबकारी विभाग में नियमों के तहत जिस नाम से आवेदन खुलता है उसी को लाइसेंसी माना जाता है। ऐसे में महिला के नाम से लाइसेंस है तो ठेकेदार भी महिला ही मानी जाती है, लेकिन ठेकेदार इसका तोड़ निकाल लेते हैं। वे नौकरनामा या इसी तरह का दूसरा दस्तावेज बना लेते हैं, जिससे दुकान संचालित करने में पुरुषों को आसानी रहती है। आबकारी नीति के तहत भी महिलाएं दुकान पर बैठकर शराब नहीं परोस सकती।
पुरुष ही पुरुष दिखे, महिलाएं दो-चार
आबकारी महकमे में दुकान के लिए कई महिलाओं के नाम से आवेदन जमा किए गए हैं। मोटे तौर पर अनुमान है कि पच्चीस फीसदी आवेदन महिलाओं के नाम जमा हुए हैं, लेकिन लॉटरी स्थल पर एकत्र हुए आवेदकों में महिलाओं की गिनती देखने में ही नहीं आ रही थी। बड़ी हद दो-चार महिलाएं ही यहां लॉटरी प्रक्रिया देखने पहुंची थीं। लिहाजा मान सकते हैं कि ठेकेदार के तौर पर महिला का नाम जरूर होता है, लेकिन ठेका संचालक कोई और ही होता है।
ठेकेदार बन सकती हैं...
दुकान का मालिक होना अलग बात है और संचालन करना दूसरी बात। आबकारी नीति में प्रावधान है कि महिलाएं शराब नहीं परोस सकती, लेकिन ठेकेदार बनने पर कोई रोकदाब नहीं है। ठेकेदार अपनी सहूलियत के हिसाब से नौकरनामा बनवा सकते हैं, जो दुकान का संचालन करेंगे। लॉटरी में महिलाओं के नाम कई जगह ठेके आवंटित हुए हैं।
- सीआर देवासी, अतिरिक्त आबकारी आयुक्त (नीति), जोधपुर
Updated on:
14 Mar 2020 12:38 pm
Published on:
14 Mar 2020 12:16 pm
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