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वीडियो में दे​खिए: ईनाणा गांव की होली देखने के लिए उमड़ी हजारों की भीड़

ईनाणा की चौपाल का निर्णय स्टंट दिखाया तो खैर नहीं...

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मूण्डवा (Nagaur). निकटवर्ती ईनाणा गांव की होली इस वर्ष शहीद हवलदार भारमल ईनाणियां को समर्पित रही। होली लाने के दौरान देशभक्ति के तराने बजे। ईनाणा की ऐतिहासिक होली को देखने के लिए सोमवार को बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे।

गौरतलब है कि यहां की होली फूहड़पन से अछूती है। यह होली सामाजिक समरस्ता, परम्परा, एकता एवं भाईचारे की एक जीती जागती मिसाल है। नागौर उपखण्ड अधिकारी सुनील पंवार, मूण्डवा पुलिस उप अधीक्षक धन्नाराम, तहसीलदार मनीराम खीचड़, रालोपा नेता रेवंतराम डांगा सहित दूर दराज के गांवों से हजारों की संख्या में लोग ईनाणा की होली देखने पहुंचे। शाम ढलने के बाद मोटरसाकिलों, ट्रेक्टर ट्रालियों, कारों, जीपों व बसों में बैठकर लोग ईनाणा पहुंचने लगे। इस वर्ष हाई मास्ट लाइटों की वैकल्पिक व्यवस्था से लोगों को बहुत सुविधा हुई।


इस अवसर पर होली से पहले बगड़ावत गायन तथा होली उखाड़ने के बाद तेजा गायन होता है। मुगदर उठाने जैसी प्रतियोगिताएं परम्परा को आज भी कायम रखे हुए है। पुलिस कांस्टेबल सुरेश ईनाणियां पुत्र हरिराम ईनाणियां ने 75 किलो का मुगदर उठाया। वहीं प्रहलाद पुत्र मुन्नाराम ने 72 किलो वजन का मुगदर भी एक हाथ से उठाया। इस बार यहां बहुत लम्बी होली का दहन किया गया। इस होली को गिराने के लिए बड़ा मठ के चौक से सांगड़े लेकर जब युवकों की टोलियां दौडऩे लगी तो बाहर से आए लोग उन्हें आश्चर्य से देखते ही रह गए। रात्रि में करीब ग्यारह बजे होलीका दहन किया गया। पंडित ने पूजन करवाया। होलीका दहन के दौरान जलती हुई होली को बुझाने के लिए भी युवकों ने आग की भी परवाह नहीं की। करीब सात फिट गहरी जमीन में गाडी गई होली कड़ी मशक्कत के बाद रात्रि सवा बारह बजे गिराई जा सकी।


अच्छे जमाने की आस

होली का दहन के समय लोग आग की लपटों पर टकटकी लगाए देखते रहे। इस बार होलिका दहन के समय आग की लपटें पहले सीधी गई। फिर पश्चिम दिशा में गई, जो अच्छे जमाने के संकेत हैं। इस शगुन से यह उम्मीद जताई जा रही है कि अच्छी बारिश होगी। यहां मान्यता है कि होली दहन के समय आग की लपटें जिस दिशा में जाती है उस दिशा में अच्छी वर्षा होती है। यदि यह लपटें सीधे दक्षिण में चली जाती हैं तो अकाल निश्चित माना जाता है।

ली ढूंढ व किया रामा-श्यामा

होली गिरने के बाद युवकों की टोलियों ने पिछली होली के बाद जन्म लेने वाले बालकों की ढूंढ ली। दूसरे दिन मंगलवार को रामा-श्यामा के बाद डांडिया नृत्य हुआ। जिसमें युवा एवं बुजुर्गों ने विभिन्न वेश धारण कर नगाड़े की थाप के साथ जुगलबंदी की। इस दौरान हंसोड़ों ने स्वांग रचकर खूब गुदगुदाया।

स्टंट दिखाया तो खैर नहीं

रामा-शामा के दिन चौपाल पर कई मुद्दों पर चर्चा हुई। चर्चा के बाद तय किया गया कि अब आगे से कोई भी व्यक्ति चाहे युवा हो या बड़ा कोई भी दुपहिया और चार पहिया वाहनों से स्टंट नहीं करेगा। ऐसा करने वाले को गांव की मर्यादा का दोषी माना जाएगा। पुलिस को कार्रवाई करनी पड़े, उसके पहले गांव की चौपाल ने अच्छा निर्णय लिया है। साथ ही कुछ शरारती तत्वों के होलिका के दौरान जलते हुए झिरमोटिए फेंकने को भी गलत बताया गया। आगजनी व अन्य अनहोनी की आशंका से इस पर भी सख्ती से पाबंदी लगाई गई है। इस दौरान सरपंच रूपाराम रोज, पूर्व सरपंच ओमप्रकाश ईनाणियां, रामलाल ईनाणियां, राजेश ईनाणियां, नरेन्द्र पीटीआई, भंवरूराम, आईदानराम, अणदाराम, तेजाराम, गरीबराम, बबलू ईनाणियां, कालूराम, पूनाराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।