
-आचार्य सुरीश्वर के 16 उपवास का पारणा हुआ
नागौर. सुराणा की छोटी पोल में आचार्य सुरीश्वर के 16 उपवास का पारणा हुआ। इस मौके पर श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए आचार्य सुरीश्वर ने कहा कि जैन धर्म में शुद्ध एवं निर्मल भावों का ही अत्यधिक महत्व है। हृदय के शुद्ध भावों से परमात्मा की प्राप्ति तक संभव हो सकती है। उन्होंने कहा व्यक्ति मंदिर में जाने वाला व्यक्ति भी यदि मूर्ति के समक्ष अपने ह्रदय के भावों को जोड़ नहीं पाता है तो फिर इसकी कोई सार्थकता नहीं है। कहने का अर्थ यह है कि फिर ऐसे लोगों का मंदिर जाने से कोई लाभ नहीं है। उन्होंने कहा भावों से ही तीर्थंकर गोत्र का बंध किया जा सकता है। भावना से ही वितरागता आ सकती है। भावों से ही पुण्य कर्म का उदय एवं पाप कर्म की निर्जरा हो सकती है। उन्होंने कहा आज नहीं तो, कल इस जीवन से सेवानिवृत्ति तो लेनी ही पड़ेगी, किंतु सेवानिवृत्ति ऐसी होनी चाहिए कि हम सांसारिकता से निवृत्ति लेकर आध्यात्मिकता की ओर प्रवृत्ति लेने में सफल हो जाएं। उन्होंने कहा जो वस्तु आपकी कभी हो नहीं सकती है। उसके प्रति ममत्व व एवं लालसा नहीं रखनी चाहिए। इंद्रियों से होने वाले पापों की व्याख्या करते हुए कहा कि जिह्वा का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहां की स्वाद के वशीभूत होकर रसेन्द्रिय पर काबू न कर पाना कई पापों को पल्लवित कर देता है। रात्रि भोजन करना एवं कंदमूल का सेवन करना जीव हिंसा बढ़ावा देता है। हिंसा से पापों में बढ़ोतरी होती है। उन्होंने कहा की जीवन की छोटी सी छोटी गतिविधि में सकारात्मकता होनी चाहिए। नकारात्मकता राग द्वेष एवं क्रोध को जन्म देती है। क्रोध दावानल के समान है। यह तो सब कुछ जलकर खा कर देता है। उन्होंने जीवन में मन मुटावों एवं वैर विरोधो पर विराम लगाने की प्रेरणा देते हुए पंथवाद के साथ पनप रहे झगड़ों पर भी अंकुश लगाने की नसीहत दी दी। इसके पूर्व गाजे-बाजे के साथ सकल संघ से आचार्य सुरीश्वर छोटी की पोल पहुंचे तो लोगों ने स्वागत किया। इस दौरान दीक्षार्थी अंकुर सबलावत का तपागच्छ ट्रस्ट मंडल की ओर से बहुमान किया गया।
-हरित संगम मेले में जड़ी बूटियों के साथ मिलेगा आयुर्वेदिक ज्ञान, लगेंगी सभी प्रकार की स्टॉलें
नागौर. अशुद्ध खानपान एवं दोषयुक्त हो चुकी जीवन शैली के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हरित संगम मेले का तीन दिवसीय आयोजन नौ मार्च से राजकीय सेठ किशनलाल कांकरिया उच्च माध्यमिक विद्यालय में होगा। आयोजन में नगरपरिषद, अपनादेवी पर्यावरण नागरिक संस्थान, पर्यावरण गोसेवा ग्राम विकास समिति के सौजन्य से होगा। इसमें लोगों को पारंपरिक रहन-सहन एवं खानपान की न केवल जानकारी दी जाएगी, बल्कि समझाइश के साथ ही विविध कार्यक्रम भी होंगे। संगोष्ठी के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इसके अलावा विभिन्न आयु वर्ग की तीन दिनों तक लगातार प्रतियोगिताएं भी होंगी। मेले में देशी खाद्य पदार्थों व परंपरागत घरेलू उपकरणों की स्टॉलें भी लगाई जाएगी। इनमें जड़ी बूटियां की प्रदर्शनी के अलावा देसी गाय का घी, घाणी का तेल, मिट्टी, लकड़ी व लोहे के परंपरागत खिलौने भी मिलेंगे। इसके साथ ही चिकित्सा परामर्श भी मिलेगा एवं चिकित्सा की जानकारी भी दी जाएगी। इस दौरान न केवल यज्ञ, हवन, योगासन व मलखंब आदि सीखने को मिलेंगे, बल्कि महिलाओं एवं विद्यार्थियों की विविध प्रकार की प्रतियोगिताएं होगी। अपना संस्थान राजस्थान क्षेत्र के संयोजक विनोद कुमार मेलाना ने बताया कि आयोजन पर चर्चा के लिए शारदा बाल निकेतन विद्यालय में बैठक हुई। इसमें कार्यक्रम की सफलता के लिए विचार-विमर्श किया गया।
Updated on:
17 Feb 2025 10:16 pm
Published on:
17 Feb 2025 10:15 pm
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
