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VIDEO….याग मंडल विधान पूजन के साथ हुए विविध धार्मिक कार्यक्रम

Nagaur. महिलाएं भारतीय संस्कृति के अनुरूप पहनावा धारण करें

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नागौर. पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को गर्भ कल्याणक रूप में मनाया गया। इस दौरान विविध धार्मिक अनुष्ठान हुए। सौधर्म इंद्र-इंद्राणियां भी शामिल हुई। इस दौरान भगवान को अध्र्य दिए जाने के साथ मंगल कामनाएं की गई। कार्यक्रम में सुबह जाप्यारम्भ एवं जिनाभिषेक के साथ ही दोपहर में याग मंडल विधान पूजन हुआ। तत्पश्चात् गर्भ कल्याणक संस्कार विधि एवं पूजन हवन के के साथ हीा गोद भराई का कार्यक्रम हुआ।इसमें सभी इन्द्र-इन्दाणियों ने भगवान की माता रानी वामा देवी की अमूल्य निधियों से गोदभराई की रस्म निभाई। इस मौके पर मुख्य अतिथि अशोक पाटनी व सुशीला पाटनी परिवार सहित पहुंचे। आचार्य सुनील सागर महाराज सहित ससंघ का दर्शन किया। विशिष्ट अतिथि के रूप् में विधायक मोहनराम चौधरी, पूर्व डीआईजी सवाई सिंह तथा नगरपरिषद सभापति मीतू बोथरा थी। अतिथियों का सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से स्वागत किया।
पहनावे में पाश्चात्य संस्कृति की नकल न करें
आचार्य सुनील सागर महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि वर्तमान में महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ अनैतिक घटनाएं तेजी से बढ़ी है। इस पर अंकुश लगाने के लिए खुद पर लगाम लगानी होगी। पहनावा भारतीय संस्कृति के अनुरूप होना चाहिए। इसके साथ ही अपने अचार-विचार भी भारतीय संस्कृति के अनुकूल करने होंगे। उन्होंने माता की महत्ता समझाते हुए कहा कि माताएं शक्ति का प्रतीक होती है। माताएं ही तीर्थंकर को अपनी कोख में पालती ह,ै और जन्म देती है। तीर्थंकर सूरज की भांति सम्पूर्ण विश्व को प्रकाशित करने तथा धर्म का आरोहण करने के लिए धरा पर जन्म लेते हैं। विश्व कल्याण के लिए तीर्थंकरों के संदेशों को हमें जीवन में अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि हर काम दौलत से नहीं हो सकता है। जो कार्य धन से नहीं होता, वह कार्य पुण्य और भाग्य से प्राप्त हो सकता है। इसलिए धर्म के मार्ग पर चलते हुए पुण्यार्जन करना आवश्यक है। पुण्यफल की प्राप्ति ही भाग्योदय होता है और सौभाग्य से सब कुछ प्राप्त होता है। कुछ व्यक्ति अभाव में रहकर हमेशा अपने भाग्य को कोसते हैं। उन्हें भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए स्वयं में परिवर्तन लाना होगा। उन्होंने भगवान पाŸवनाथ एवं कमठ का उदाहरण देते हुए कहा कि कमठ के स्वभाव में जहां द्वेश, ईष्या, लोभ की भावनाएं थी, वहीं पाŸवनाथ में दया, क्षमा, करूणा, सद्भाव के गुण थे। इसी कारण आज कमठ को नहीं, बल्कि पाŸवनाथ का जगत में पूजन होता है।
केशलोचन आज
सोमवार को पंचकल्याणक महोत्सव में पंचमुष्टी केशलोचन कार्यक्रम होगा। इसमें जैन मुनि एवं आर्यिकाओं का केशलोचन किए जाने की परंपरा है। चन्द्रप्रभू दिगंबर जैन मंदिर में सुबह आठ बजे मुनि सिद्धार्थसागर, बुद्ध सागर, सुघ्यान सागर, आर्यिका आकाशमति, सुस्वरमती संगीतमती, संपूर्णमति, पन्नमति, संबलमती, क्षुल्लक विजयंत सागर, संवर्ध सागर, संप्रभ सागर, क्षुल्लिका समभावयति, संरक्ष ब्रह्मचारी अरविन्द गांधी का केश लोचन कार्यक्रम पाण्डाल में होगा। बीस पंथी दिग बर जैन मंदिर के सचिव सनत कानूगो ने बताया कि केश लोचन कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि मुनि श्री के केश लोचन का बड़ा महत्व है। जैन साधु के 28 मूल गुणों में से एक गुण केश लोंच भी है। जघन्य चार माह, मध्यम तीन माह व उत्कृष्ट दो माह के पश्चात वह अपने बालों का अपने हाथ से उखाड़ कर फेंक देते है। इस पर से उसके आध्यात्मिक बल की तथा शरीर पर से उपेक्षा भाव की परीक्षा होती है। देखने में यह दृश्य मार्मिक होता है।