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वीर चक्र विजेता नूर मोहम्मद सुपुर्द ए खाक

भारत पाक युद्ध 1971 (Bharat-Pak War 1971) में दिखाई थी जांबाजी, दुश्मन की सीमा में सात किमी पैदल चलकर किया था सर्जिकल स्ट्राइक, पुलिस ने दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर, रियांबड़ी उपखण्ड अधिकारी ने पुष्प चक्र अर्पित कर दी श्रद्धाजंलि

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वीर चक्र विजेता नूर मोहम्मद कायमखानी

पादूकलां. वीर चक्र विजेता नूर मोहम्मद को गार्ड ऑफ ऑनर देते पुलिस के जवान।

पादूकलां. राजस्थान के गौरव और वीर चक्र विजेता सथानाकलां निवासी नायब रिसलदार नूर मोहम्मद कायमखानी (91) ने शनिवार तडक़े अंतिम सांस ली। नूर मोहम्मद के निधन से सथानाकलां में शोक की लहर छा गई। उनके पुश्तैनी कस्बे में तालाब की पाल स्थित कब्रिस्तान में राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द ए खाक किया गया।

नूर मोहम्मद का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ था। दोपहर में जौहर की नमाज बाद एएसआई रामचन्द्र भाटी के नेतृत्व में सुपुर्द ए खाक के पहले गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। रियांबड़ी उपखण्ड अधिकारी सुरेश केएम ने पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी। इससे पहले नूर मोहम्मद के शव के अंतिम दर्शन के लिए उनके निवास स्थान पर पहुंचने वालों का तांता लगा रहा। वीर चक्र प्राप्त नूर मोहम्मद 1971 के भारत-पाक युद्ध में टैंक से उतर कर पैदल 7 किलोमीटर अंदर तक दुश्मन देश में सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले महान योद्धा थे। इसी बहादूरी के चलते भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया। इनायत अली खान नूर मोहम्मद के छोटे भाई थे। जो भी 1971 भारत पाक युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते शहीद हो गए थे।


राजस्थान सरकार ने नवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में इनकी गाथा को किया था शामिल

देश की सरहदों की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों की गाथाओं को राजस्थान सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया था। कक्षा नवीं की राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन एवं शौर्य परम्परा पुस्तक में 1948 से लेकर वर्ष 2019 में हुए पुलवामा हमले के शहीदों के पाठ शामिल किए गए हैं। पाठ्यक्रम समीक्षा समिति का दावा था कि संभवतया देश में राजस्थान पहला राज्य है, जिसने अपने प्रदेश के अमर शहीदों को पाठ्य पुस्तक में शामिल किया। शिक्षा विभाग ने पहली बार स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों में राजस्थान की मार्शल एवं निडर कौम कायमखानी मुस्लिम समाज के वीरचक्र विजेता शहीदों के नाम शामिल किए।

वीर चक्र युद्ध में बहादुरी के प्रदर्शनों के लिए अहम् पुरस्कार

वीर चक्र युद्ध में बहादुरी के प्रदशनों के लिए प्रस्तुत एक भारतीय बहादुर पुरस्कार है। यह युद्ध के समय गैलेंट्री अवॉर्ड्स की प्राथमिकता में तीसरा है और परम वीर चक्र और महावीर चक्र के बाद आता है। यह सम्मान जमीन पर, समुद्र में या हवा में दुश्मन की उपस्थिति में बहादुरी का प्रदर्शन करने वाले वीर योद्धाओं को दिया जाता है। यह सम्मान मरणोपरांत भी दिया जा सकता है।


पदक मानक रजत से निर्मित यह थे उपस्थित

वीर चक्र पदक मानक रजत से निर्मित गोलाकार होता है। पदक का व्यास 3/8 इंच होता है। इसके ऊपरी भाग पर पांच बिंदुओं वाला राजकीय सितारा अंकित होता है और सितारे का प्रत्येक बिंदु पदक के बाहरी किनारे को स्पर्श करता है। इसके बीचों-बीच राजकीय चिह्न होता है जो गुंबदाकार होता है। सितारे और केंद्रीय भाग पर सोने की पॉलिश की जाती है। इसके पृष्ठभाग पर हिंदी एवं अंग्रेजी भाषाओं में वीर चक्र लिखा होता है, जिसके बीच में दो कमल के फूल बने होते हैं। इसके ऊपरी हिस्से पर छल्ला बना होता है। रिबन रंग में आधा नीला और आधा नारंगी होता है।

नूर मोहम्मद की अंतिम विदाई के वक्त सीआई रमजान खां, पूर्व सरपंच अयुब खां, लक्ष्मणसिंह, भंवराराम मेघवाल, उप सरपंच हरिराम लोरा, अख्तर खां, पूर्व एएसआई लतिफ खां, कैप्टन रिटायर्ड अल्लादीन खां, निसार खां, अकरम खां, अयाज कायमखानी, नेनूराम गरवा, मोती खां, सिकंदर खां, वैधद्य राहुल चौधरी, आलम खां, पूसाराम आदि मौजूद थे।