नागौर. दस दिनों तक चलने वाले गणपति महोत्सव की शुरुआत शनिवार से सात शुभ योगों के संयोग में मनाई जाएगी। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि पंचांग के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी पर बहुत से शुभ योग भी बन रहे हैं। इस दिन चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, ब्रह्म योग, इंद्र योग, काणयोग, सिद्धि योग,के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इसके बाद स्वाति नक्षत्र लगेगा। इसके साथ ही इस दिन ब्रह्म योग, इंद्र योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेंगे। चित्र एवं स्वाति नक्षत्र के अभिजीत मुहूर्त के समय संधि काल में होने से इस बार के गणेश वैभव, संतान और सुख संपत्ति देने वाले रहेंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से 8 अगस्त की सुबह 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा लेकिन गणेश चतुर्थी को गणपति स्थापना में भद्रा का दोष नहीं होता है, क्योंकि शास्त्र अनुसार गणपति का जन्म भद्रा में ही हुआ था। इस बार अनंत चतुर्दशी 17 सितंबर को रहेगी।
गणेश चतुर्थी का यह रहेगा मुहूर्त
इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 6 सितंबर की दोपहर को 3 बजकर 1 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन अगले दिन 7 सितंबर की शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, गणेश चतुर्थी का शुभारंभ 7 सितंबर यानि की दिन शनिवार से होगा। इसी दिन गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना होगी और व्रत रखा जाएगा। गणेश चतुर्थी की पूजा और मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, दोपहर अभिजीत मुहूर्त वृश्चिक लग्न में 12 बजकर 11 मिनट से लेकर दोपहर के 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इसके बाद जरूरत अनुसार धनु लग्न भी 3 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। विशेष जरूरत अनुसार यदि सुबह स्थापना करनी हो तो कन्या लग्न में कर सकते हैं। जिसका शुभ समय सुबह 7 बजकर 51 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
गणपति पूजन में इसका ध्यान रखना होगा
गणपति पूजन में तुलसी के पत्त्ते, टूटे हुए चावल, सफेद चीज नहीं इस्तेमाल करनी चाहिए। मुरझाए हुए माला या फूल के साथ केतकी के पुष्प का चढ़ाना भी वर्जित है। चंद्रदेव के दर्शन भी इस दिन निषेध हैं।
इस तरह से करें गणपति बप्पा की प्रतिमा की स्थापना
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मध्यकाल के किसी शुभ मुहूर्त में गणेश जी की ऐसी मिट्टी की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। इसकी सूंड दायी ओर होने के साथ ही जनेऊधारी भी हो। इनके साथ मूषक भी होना चाहिए। बैठी मुद्रा की मूर्ति होनी चाहिए। स्थापन के समय इनका मुख गणेशजी की मूर्ति का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। यदि संभव नहीं हो तो पूर्व की तरफ भी कर सकते हैं। लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर गणपति की मूर्ति को विराजित करना चाएि. उसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को फिर वहां सिर्फ विसर्जन के समय ही हटाना चाहिए।
यह होनी चाहिए पूजन सामग्री
गणपति के पूजन में गणेश मूर्ति, लकड़ी की चौकी, केले के पौधे मंडप बनाने के लिए। पीला और लाल रंग का कपड़ा, नए वस्त्र, जनेऊ, पताका, चंदन, दूर्वा, फूल, अक्षत, पान का पत्ता, सुपारी, मौसमी फल, धूप, दीप, गंगाजल, कपूर, सिंदूर, कलश, मोदक, केला, पंचामृत, पंचमेवा, मौली, आम और अशोक के पत्ते, गणेश चालीसा और आरती, गणेश चतुर्थी व्रत कथा की पुस्तक होनी चाहिए।