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वीडियो : सरकारी स्कूलों में होगा बड़ा बदलाव, जानिए कैसे

- पत्रिका नींव अभियान : हर स्कूल मॉडल स्कूल को लेकर वीसी - राजस्थान पत्रिका व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे अभियान के तहत कलक्टर ने शिक्षा अधिकारियों को दिया बदलाव लाने का संदेश

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Big changes will be in government schools

नागौर. सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने एवं छवि बदलने के लिए राजस्थान पत्रिका के नींव अभियान के तहत नागौर जिले में जिला प्रशासन के साथ मिलकर चलाए जा रहे 'हर स्कूल, मॉडल स्कूलÓ अभियान को लेकर बुधवार को कलक्ट्रेट स्थित आईटी केन्द्र में वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई। वीसी में कलक्टर कुमारपाल गौतम ने सभी शिक्षा अधिकारियों एवं शिक्षकों से कहा कि हम राजस्थान पत्रिका के साथ मिलकर नागौर जिले की स्कूलों में बदलाव लाना चाहते हैं, जो आप लोगों के सहयोग से ही संभव होगा। यदि यह बदलाव हो गया तो नागौर राजस्थान ही नहीं पूरे देश में रोल मॉडल बन जाएगा।

शिक्षकों की योग्यता की तुलना करें
कलक्टर गौतम ने कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षकों की योग्यता सरकारी शिक्षकों के सामने कुछ भी नहीं है। जो सरकारी शिक्षक नहीं बन पाते हैं, वे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने जाते हैं। इसके बावजूद प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ रही है और सरकारी में घट रही है। इसकी मुख्य वजह हमारी उदासीनता है, इसलिए हमें अब हर सरकारी स्कूल को मॉडल स्कूल की तरह बनाना है। इसके लिए बदलाव के दस सूत्र तैयार किए गए हैं, जिनकी पालना करते हुए समाज में अच्छा संदेश देना है।

दिल से करें शुरुआत
कलक्टर ने शिक्षा अधिकारियों एवं शिक्षकों से आह्वान करते हुए कहा कि हर स्कूल - मॉडल स्कूल के तहत शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड, शुरुआती कक्षाओं को डिजिटल बनाना, सभी स्कूल भवनों का रंग एक तरह का होना सहित दस बिन्दू हैं, लेकिन यह हमने अनिवार्य नहीं किया है, क्योंकि अनिवार्य करते ही हमारा अभियान फेल हो जाएगा। हम चाहते हैं कि प्रत्येक शिक्षक इस अभियान से दिन से जुड़ें और आगे आकर पहल करे। शिक्षक को देखकर न केवल बच्चे बल्कि उनके अभिभावक भी प्रभावित होते हैं, इसलिए इस बदलाव को लाकर सरकारी स्कूलों की छवि बदलनी है।

पढ़ाई का स्तर अच्छा तो फिर नामांकन क्यों नहीं
राजस्थान पत्रिका के संपादकीय प्रभारी रुदेश शर्मा ने वीसी को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के पास जो योग्यता है, वह निजी वालों के पास नहीं है, इसके बावजूद अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश निजी स्कूलों में करवा रहे हैं, क्योंकि वे उनके अनुशासन एवं डेमो से प्रभावित होते हैं। इसलिए हम भी ड्रेस कोड में आकर अनुशासन का परिचय दें और मॉडल स्कूल की तरह नवाचार करते हुए समाज में अच्छी स्कूल का संदेश दें, ताकि अभिभावक निजी स्कूलों से बच्चों को निकालकर सरकारी में प्रवेश करवाएं।