
Chousla News
चौसला. रात के अंधेरे में शहर की तर्ज पर गांवों की गलियों को रोशन करने चाहा सपने को हकीकत में बदलने के लिए पिछले कुछ सालों में पंचायत फंड से लाखों रुपये खर्च भी हुए। हकीकत में यह सपना आज भी अधूरा ही नजर आ रहा है। कारण गांव की गलियों में सोलर लाइट लगने के बाद ग्राम पंचायत या फिर संबंधित कंपनी शायद ही कभी उनकी सुध लेती हो। इतना ही नहीं ऊर्जा संरक्षण के नाम पर गांवों की गलियों में सोलर लाइट लगने के साथ ही ऊर्जा संरक्षण विभाग के अधिकारी भी अपने कार्य की इतिश्री करते हुए मुंह मोड़ रहे है। ऐसे में सोलर लाइटों के सहारे सपने को हकीकत में बदलने की इस कवायद के बाद भी गांवों की अधिकतर गलियों में रात के अंधंरे का सन्नाटा पसरा देखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार कस्बे सहित क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों के माध्यम से सैकड़ों स्ट्रीट लाइट लगाई गई। गांवों में की गई पड़ताल के दौरान पाया गया कि लगाने के कुछ समय बाद ही गांवों की गलियों में लगी अधिकतर सोलर लाइटों की बत्ती गुल होना शुरू हो गई तथा समय अवधि बढऩे के साथ बत्ती गुल होने वाली लाइटों की संख्या में इजाफा होता गया। आलम यह है कि न केवल सोलर लाइटों की बत्ती गुल हो रही है, बल्कि लाइटें गायब होने की शिकायते भी मिल रही है। गांवों में पंचायत फंड से लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी गावों की गलियों में अंधेरा पसरा रहने से जहां ग्रामीण पंचायत व सरपंच पर निशाना साधते हैं। वहीं अपने ही ग्रामीणों के निशाने से आहात सरपंच शिकायत करने के बाद भी संबंधित कंपनियों के सामने खुद को बेबस खड़ा पाते है। हाई लेवल पर होने वाली इस खरीद फरोख्त में सरपंच ही नहीं, बल्कि कई बार तो जिला स्तरीय अधिकारी भी बगले झांकते नजर आते है। इस प्रकार से लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी गलियों में पसरे अंधेरे को लेकर हर कोई एक दूसरे की तरफ बेबस नजरों से देखते रह जाते हैं।
Published on:
15 Oct 2018 07:08 pm
