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प्रशासन की सख्ती, तहसीलदार ने निरस्त किए 8 नामांतरण, मचा हड़कंप

MP News: प्रकरण की शिकायत जिलाधीश को मिलने के बाद तहसीलदार शौकत अली ने पटवारी कैलाश सिंह राजपूत की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए 1 जुलाई 2025 को आठ नामांतरण निरस्त कर दिए।

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फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: एमपी में झारड़ा गांव की बड़ी पुलिया के आसपास की भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहे भू-माफियाओं के खेल पर आखिरकार प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 1986 में लोक निर्माण विभाग के ब्रिज कॉरपोरेशन (सेतु निगम) द्वारा निर्मित पुल के आसपास की भूमि शासन द्वारा अधिग्रहीत कर ली गई थी, लेकिन त्रुटिवश 11 सर्वे नंबरों में नामांतरण नहीं होने से यह भूमि पूर्व भूस्वामियों के नाम दर्ज रही और उस पर खरीदी-बिक्री का अवैध खेल चलता रहा।

प्रकरण की शिकायत जिलाधीश को मिलने के बाद तहसीलदार शौकत अली ने पटवारी कैलाश सिंह राजपूत की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए 1 जुलाई 2025 को आठ नामांतरण निरस्त कर दिए। ये नामांतरण 27 जून को किए गए थे, जिनमें सर्वे नंबर 898 पर दर्ज कई भूखंड धारकों के नाम शामिल थे।

लंबे समय से चल रहा था गोलमाल

राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा समिति के प्रदेश अध्यक्ष मांगीलाल कुमावत और जनपद सदस्य किशोर माली ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि पिछले 15 वर्षों से सेतु निगम की भूमि पर नामांतरण और निर्माण का गोरखधंधा चल रहा था। कुछ भूखंडों पर दुकानें बनाकर 25 लाख तक में बेची गई हैं। उनका कहना है कि जमीन को विवादित बता कर आज भी प्रॉपर्टी ब्रोकरों के द्वारा कौडियों के दाम में खरीद की जा रही। राजस्व अधिकारियों से सांठगांठ कर तत्काल नामांतरण करवाकर करोड़ों का खेल कर रहे हैं। कईं सर्वे नंबर पर लोगों ने बड़े-बड़े मकान बना लिए हैं ।

25 -25 लाख में बेची जा रही दुकानें

वर्ष 2021 में भीम आर्मी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश वर्षी ने इसको लेकर जिलाधीश को शिकायत दर्ज करई गई थी बावजूद इसके सर्वे नंबर 866, 869 पर स्थित ब्रिज कॉरपोरेशन की भूमि शीवानी पारस चौरड़िया द्वारा जमीन खरीद कर तत्कालीन तहसीलदार तथा तत्कालीन सरपंच की मिली भगत से नामांतरण करवा कर पंचायत द्वारा नर्मित दीवार पर 10 दुकानों का निर्माण कर लिया गया। इन दुकानों को 25 -25 लाख रुपए में बेचा जा रहा है।

सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा मामला

अब प्रशासन की सख्ती से सर्वे नंबर 864, 867, 868, 869, 870, 898 समेत कई भूखंडों पर मकान और दुकानों के मालिकों में चिंता और हलचल का माहौल है। मामला सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच चुका है, और आगे की जांच की मांग की जा रही है।

हमारे संज्ञान में जब मामला आया तो शासन के हित के लिए हमने नामांतरण निरस्त कर दिये, सेतु निगम को भी हमने पत्र भेजा था लेकिन उनका आज तक कोई जवाब नहीं आया- शौकत अली, तहसीलदार, झारडा

प्रशासन की सख्ती से मचा हड़कंप

पटवारी कैलाश सिंह राजपूत के द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार शौकत अली ने सर्वे नंबर 898 पर दर्ज भूखंड धारक कैलाश पिता रणछोड़, बहादुरसिंह पिता फूल सिंह सिसोदिया, प्रताप सिंह पिता करण सिंह, लोकेंद्र सिंह पिता मनोहर सिंह, घनश्याम दास, दिलीप दास पिता कालू दास, यशवंत पिता पदम सिंह, प्रभु लाल पिता लक्षमण, कमल सिंह पिता पदम सिंह का नामांतरण जो 27 जून 2025 को किया गया था उसे 1 जुलाई 2025 को निरस्त कर दिया है।