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छुट्टियों पर रोक लगाई, सरकार ने जारी किए आदेश, नए साल के जश्न के कार्यक्रम स्थगित

कर्मचारियों की छुट्टियों पर हड़ताल के कारण ब्रेक, मौजूदा कर्मचारियों को बेहद जरूरी होने पर ही दे रहे अवकाश

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नागदा. सरकार के एक आदेश के कारण कर्मचारियों—अधिकारियों के नए साल के जश्न के कार्यक्रम स्थगित हो गई है. बीते 15 दिनों से चल रही संविदाकर्मियों की हड़ताल ने बाकी कर्मचारियों की लेफ्ट-राइट बढ़ा दी हैं। हड़ताल के चलते काम प्रभावित नहीं हो, इसके लिए विभाग ने मौजूदा स्टॉफ की छुट्टियों पर ब्रेक लगा दिया है। इससे कर्मचारियों को न केवल बगैर छुट्टी के लगातार काम करना पड़ रहा है बल्कि वे नए साल का जश्न भी नहीं माना पा रहे हैं।

नागदा के सरकारी अस्पताल में 7 डॉक्टर्स मिलाकर कुल 30 लोगों का स्टॉफ है। इसमें से 10 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। 20 लोग ही काम कर रहें हैं। इनसे मजबूरन बिना छुट्टी के काम कराया जा रहा है। इंचार्ज मेडिकल ऑफिसर डॉ. गौरव पटेल ने कहा है कि यहां संविदा में नर्सिंग स्टॉफ हैं। संविदाकर्मियों की हड़ताल के चलते काम प्रभावित हो रहा है। इसलिए मजबूर मौजूदा कर्मचारियों से ही काम चलाना पड़ रहा है. हालांकि किसी कर्मचारी से एक्सट्रा काम तो नहीं ले रहें हैं लेकिन जरूरी काम प्रभावित नहीं हों इसलिए छुट्टियों पर ब्रेक लगा दिया है।

इसलिए हड़ताल- संविदा कर्मचारियों को नियमित करने व पूर्व में हटाए गए संविदा कर्मचारियों को पुन: विभाग में रखकर उन्हें भी नियमित करने की मांग को लेकर संविदाकर्मी हड़ताल पर चल रहे हैं। इन कर्मचारियों का जिला मुख्यालय उज्जैन के सामाजिक न्याय परिसर में धरना चल रहा है।

ये काम भी प्रभावित
टीबी विभाग में खखार की जांच नहीं हो रही है, बीपी शुगर की दवाईयां नहीं मिल रही, नेशनल हेल्थ पोर्टल पर एंट्री जैसे कार्य भी प्रभावित होने की खबर हैं। नागदा, खाचरौद, उन्हेल में लगभग 40 सब सेंटर है जहां संविदा पर रखी गई सीएचओ की नियुक्तियां हैं। हड़ताल के चलते यह सभी सेंटर भी प्रभावित हो रहें हैं।

नागदा से जो स्टॉफ हड़ताल पर हैं। उनमें ज्यादातर नर्सिंग स्टॉफ हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कुल 16 नर्स है जिसमें से 5 हड़ताल पर हैं। 2 मातृत्व अवकाश पर हैं। यानी 9 ही ड्यूटी पर है। इससे बहुत से काम प्रभावित हो रहें हैं। नागदा से ही उज्जैन-जावरा हाइवे गुजरने से यहां हादसे ज्यादा होते हैं। ऐसी स्थिति में मौजूदा कर्मचारियों की लेफ्ट-राइट ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसके अलावा ओपीडी, एनआरसी, गर्भवती महिलाओं की देखरेख, टीकाकरण जैसे काम प्रभावित हो रहें हैं। एनआरसी पर तो फिलहाल ताला लगा हुआ हैं।