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ऐसा है सिविल अस्पताल….न पलंग पर चादर, न ही सफाई व्यवस्था

नगर का सिविल अस्पताल, जिसका काम है लोगों के दर्द से निजात देना। लेकिन जमीनी स्तर पर यहां तकलीफ ज्यादा मिलती है।

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नागदा. नगर का सिविल अस्पताल, जिसका काम है लोगों के दर्द से निजात देना। लेकिन जमीनी स्तर पर यहां तकलीफ ज्यादा मिलती है। नगर के प्रमुख अस्पताल में न तो पलंग पर चादर बिछे हैं और न ही सफाई व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम। स्थिति यह है कि चारों तरफ गंदगी का आलम। एक तरफ स्वाइन फ्लू का खतरा मंडरा रहा है, वहीं सिविल अस्पताल की यह हालत देख अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का अहसास हो जाता है। वह सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं और उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। कल ही अस्पताल में प्रसूता और नवजात के इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया था। जिसमें यहां के कर्मचारियों पर रिश्वत मांगने तक के आरोप लगे थे। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की हालत यह है कि वह कार्रवाई करना तो दूर जांच करने भी नहीं पहुंचे। सिविल अस्पताल के व्यवस्था को खंगालती पत्रिका की विशेष रिपोर्ट...।

यहां चादर तक नसीब नहीं
समय : १२.१८ बजे
स्थान : प्रसूती कक्ष
अस्पताल में चल रही लापरवाही का नमूना लेबर पेन से तड़प रही महिला को देख लग सकता है। पेन के दौरान महिला के समीप परिजनों के सिवा कोई नर्स या वार्ड स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं हैं। इतना ही नहीं प्रसूता को जिस बैड पर लेटाया गया है, उस पर अस्पताल कर्मचारियों ने चादर बिछाना भी जरूरी नहीं समझा। माना जाता है, कि प्रसव के पूर्व गर्भवती को एंटीबेक्टीरियल एरिया या सुविधाओं के साथ रखा जाता है। लेकिन लेबर पेन से तड़प रही प्रसूता के पास किसी जिमेदार नहीं आना उचित नहीं समझा।

यहां से नहीं उठता कचरा
समय : १२:२५ बजे
स्थान : महिला वार्ड
प्रसव के बाद महिलाओं को जनरल महिला वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। आमतौर पर प्रसूताओं को दो दिन के बाद उक्त वार्ड में भेजा जाता है। लेकिन अस्पताल में लापरवाही का आलम यह है, कि वार्ड के बाहर और अंदर रखी गई। डस्टबिन को उठाने कर्मचारी यदा-कदा पहुंचते हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों को स्वयं जाकर कचरा बाहर फेंकना पड़ता है। वार्ड अटेंडेंट से परिजनों द्वारा शिकायत किए जाने पर कर्मचारियों का अभाव बताकर पल्ला झाड़ लिया
जाता है।

यहां कोई भी घूमे, अधिकारी अनजान
समय : १२:४० बजे
स्थान : डायलिसिस कक्ष
परिसर के पीछे की ओर वर्तमान में नवीन डायलिसिस मशीन स्थापित की गई। कक्ष के समीप ही कैमिकल व ऑक्सीजन सिलेंडरों को स्टोर करके रखा जाता है। जिम्मेेदार इस बात को भी भूल जाते हैं, कि रूम में कैमिकल व ऑक्सीजन सिलेंडर पड़ा है। यदि कोई असामाजिक तत्व कक्ष में रखे कैमिकल का दुरुपयोग करें तो क्या होगा। अस्पताल प्रबंधन के लिए मरीजों की जान कोई मजाक से कम नहीं है। पत्रिका टीम केमिकल रुम के बाहर करीब २० मीनट तक खड़ी रही किसी ने सुध तक नहीं ली।

वार्ड के पीछे शराब पीते हैं लोग
समय : १.०० बजे
स्थान : पिछला हिस्सा
अनियमिताओं का पुलिंदा बन चुका सिविल अस्पताल में सबसे बड़ी परेशानी असामाजिक तत्वों का बसेरा है। परिसर के पीछे की ओर नवीन कक्षों का निर्माण किया जा रहा है। उक्त कक्ष के समीप ही महिला वार्ड है। जहां असामाजिक तत्वों का जमघट लगा रहता है। प्रबंधन भी उक्त परेशानी की ओर साहस दिखााकर ध्यान नहीं दे पाता। कारण विवाद को बढ़ावा देना है। प्रबंधन के भययुक्त वातावरण का खामियाजा असामाजिक तत्वों को भुगतना पड़ता है। परेशान मरीजों को होना पड़ता है।

सीधी बात : डॉ. संजीव कुमरावत,
प्रभारी सिविल अस्पताल
सवाल : प्रसूता से रिश्वत के मामले में क्या कार्रवाई हुई।
जवाब : कार्रवाई की जा रही है, नर्सों से जवाब मांगा गया है।
सवाल : नर्सों पर अभद्रता का भी आरोप परिजनों ने लगाया है।
जवाब : दोनों पक्षों की बात सुनकर ही कुछ कहा जा सकेगा।
सवाल : स्टाफ की कमी है। लोग परेशान होते हैं। क्या क रहे हैं।
जवाब : उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है। वहां से ही स्टाफ बढ़ेगा।
सवाल : अस्पताल परिसर में गंदगी व सफाई का अभाव है।
जवाब : मेरे द्वारा पूर्व में भी बताया जा चुका है, फिलहाल में उज्जैन हूं, अस्पताल में पहुंचकर कुछ बता पाउंगा।
सवाल: अस्पताल में गंदगी है। स्वाइन फ्लू का खतरा है।
जवाब: हां पता है, मैं अभी कुछ नहीं कह सकता।