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video दहशत में ग्रामीण: उज्जैन का एक गांव, जहां हर कोई डर रहा मौत रूपी बीमारी से

20 दिन में तीसरी मौत, इस बार महिला बनी शिकार, गांव में हालात ऐसे कि हर घर में खटिया पर लोग

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नागदा. ग्राम परमारखेड़ी के दूषित पानी ने गुरुवार को एक और महिला की जान ले ली। ३५ वर्षीय धापूबाई पति देवीसिंह दो दिनों से बीमार थी। ग्राम में २० दिनों में यह तीसरी मौत है। वहीं १००० लोग हड्डी रोग से जूझ रहे हैं। गांव की हालात यह हो चुकी है, कि बच्चे भी विकलांग जन्म ले रहे हैं। दो माह पूर्व सवजी के यहां पोत्र का जन्म हुआ। जन्म के बाद से ही नवजात बीमारी की चपेट में आ गया। वर्तमान में नवजात किसी की ओर आकर्षित नहीं हो रहा है।

अज्ञात बीमारी की चपेट में आए
बीते बुधवार को प्रदूषित पानी के सेवन से अज्ञात बीमारी की चपेट में आए बाबूलाल पिता नंदा की मौत हो गई, इसके पूर्व अक्टूबर माह के शुरुआत में गांव में ३० वर्षीय किशोर की मौत हुई थी। वहीं शुक्रवार को प्रदूषित पानी के सेवन से बीमार हुई धापूबाई पति देवीसिंह की भी मौत हो गई। परेशानी यह है, कि गांव के समीप से चंबल नदी गुजर रही है। नदी में शहर के तीनों उद्योगों द्वारा रसायनयुक्त पानी को नाले के माध्यम से चंबल में छोड़ा जाता है, जिससे मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है। स्थिति यह है, कि दूषित पानी की चपेट में आए ग्रामीणों को स्वास्थ्य विभाग और ग्रेसिम, केमिकल व लैंसेक्स उद्योग शिविर के नाम पर रेवड़ी बांटने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन उद्योगों की रेवड़ी मुंह मीठा करने के बजाए ग्रामीणों के लिए जहर साबित हो रही है। एकाएक मौतों से बौखलाया उज्जैन स्वास्थ्य विभाग के एक जांच दल ने शुक्रवार को ग्रामीणों का स्वास्थ्य परिक्षण किया। जिसमें बीमार ग्रामीणों की स्लाइड बनाई और खानापूर्ति कर चले गए। विड़बना यह है, कि मौत की सूचना पर विधायक दिलीपसिंह शेखावत ग्रामीणों से दर्द बांटने पहुंचे, लेकिन गांव में पानी की बोतल लेकर पहुंचे। जानते सब हैं, लेकिन दूषित और बीमारियों के कारणों का पता नहीं चल पा रहा हैं।

महिलाएं भी हैं बीमार : दो विशेषज्ञ चिकित्सक पहुंचे, दवाई भी बांटी
जला मुख्यालय से दो विशेषज्ञ चिकित्सों का एक दल शुक्रवार को गांव परमारखेडी में पहुंचा और ग्रामीणों की जांच की।जांच दल ने गांव से पानी के सेंपल लिए और जांच के लिए पीएची विभाग को भेजा। टीम ने पीने के पानी व नहाने के पानी दोनो के सेंपल लिए।ग्रामीण पीने का पानी 3 किमी दूर गांव भगतपुरी से आते और नहाने व दैनिक उपयोगी कार्यके लिए पानी गांव में बोरिंग से ही लेते है।टीम में तीन चिकित्सों के अलग-अलग दलों ने ग्रामीणों की जांच की और दवाईया वितरण किया। टीम ने लगभग 6 २ ग्रामीण की जांच की। टीम में मेडिकल विशेषज्ञ डॉप्रमोद माहेश्वरी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ एमएल मालवीय, बीएमओ डॉ. संजीव कुमरावत ने जांच की।

मेरी मीठा पानी पीने की तमन्ना....
" मैं १० सालों से बीमार हूं। कुछ माह पूर्व चारपाई पकड़ ली। मैंने परमारखेड़ी में उन अफसरों को भी देखा है, जो हर माह गांव में आकर ग्रामीणों का उपचार करते थे। पूर्व में उद्योग द्वारा खेती के लिए बीज व अनुदान स्वरूप कुछ राशि देते थे लेकिन समय के साथ सब बदल गया। अब एक ही तमन्ना है, गांव में मीठा पानी की व्यवस्था हो।" - बापूसिंह,

ग्रामीणों का दर्द : स्थिति खराब, जांच नहीं पेयजल चाहिए
" गांव में बीमारी फैलने का मुख्य कारण है दूषित पानी, ऐसा नहीं है, कि प्रशासनिक अफसरों से छिपी है। ग्राम में जब भी कोई मौत होती है। तो विधायक, एसडीएम व उज्जैन स्वास्थ्य अमला गांव में पहुंचकर जांच करता है। मेरे स्वयं की आयु ५० साल हो गई हैं। अब तक कोई निराकरण नहीं हो सका। हमें जांच नहीं पेयजल चाहिए।" - ओमनारायणसिंह

महिलाएं बीमार हैं, हमें बनाना पड़ता है खाना
" गांव के लिए अक्टूबर माह बहुत ही दर्द भरा रहा। ५०० की आबादी में सभी घर में एक बीमार है। कारण दूषित पानी और अन्य स्त्रोतों का जल है। हालात यह हो चुकी है, महिलाओं को बुखार व जोड़ों में दर्द है। जिसके कारण खाना बनाने की जिम्मेदारी पुरुषों पर आ गई है। गांव में कोई बीमारी नहीं है, यदि साफ पानी मिले। " - मोहनसिंह गुर्जर

हमने देखी साफ चंबल, अब हालत खराब
" मैं २ अक्टूबर से बीमार हूं। हालात यह हो हैं, मुझे हर समय बुखार रहने लगा है। मैंने कलकल बहती साफ चंबल नदी देखी है। बीते १५ सालों में चंबल गंदी हुई है। भय इस बात का है, कि आगामी भविष्य हमारे बच्चों के लिए कैसा होगा। अंतिम इच्छा है गांव में सभी को स्वच्छ पानी मिले। ताकि बीमारी से छुटकारा मिले।" - स्वरूपसिंह