
नर्मदापुरम। कार्तिक मास की पूर्णिमा के अवसर नर्मदापुरम में तवा-नर्मदा नदी के संगम स्थल में बांद्राभान मेले (bandrabhan mela 2022) का आयोजन होगा। कोरोना महामारी के 2 साल बाद बांद्राभान में 6 से 9 नवंबर तक मेले का आयोजन होगा। इसे श्रद्धालु मिनी कुंभ के नाम से भी जानते हैं। इस मेले में लाखों लोग उमड़ते हैं।
मेला को लेकर कलेक्टर सिंह ने कानून व्यवस्था के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वाहन शुल्क, परमिट आदि की प्रक्रिया पूर्ण की जाए। मेला स्थल पर साफ-सफाई , पेयजल एवं बिजली की समुचित व्यवस्थाएं रखने नगर पालिका एवं जनपद पंचायत को निर्देश दिए।
कचरा डालने के लिए 100 बड़े ड्रम, चलित शौचालय भी पर्याप्त संख्या में लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि स्थल पर लेआउट डालकर पाइप लाइन डालने की कार्रवाई 2 नवंबर तक पूरी की जाए।
पेयजल के लिए पंप ऑपरेटर की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाएं। एमपीईबी को भी स्थल पर बिजली की बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए। रात्रि में बिजली जाने की समस्या न हो, इसके लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
परिवहन सुविधा
मध्यप्रदेश शासन परिवहन विभाग के द्वारा बांद्राभान मेले 2022 के लिए परिवहन किराया निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत प्रथम 5 किमी के लिए न्यूनतम किराया 7 रुपए एवं उसके पश्चात प्रति यात्री प्रति किमी 1.25 रुपए प्रति यात्री प्रति किमी के मान से निर्धारित किया गया है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के अनुसार विभिन्न स्थानों की दूरी के अनुसार किराए का भुगतान किया जाएगा। जिसमें नर्मदापुरम से बांद्राभान 7 किमी के लिए 9.50 रुपए किराया निर्धारित किया गया है।
इटारसी से बांद्राभान 25 किमी के लिए 32 रुपए, माखन नगर से बांद्राभान 30 किमी के लिए 38.25 रुपए, सिवनी मालवा से बांद्राभान 55 किमी के लिए 69.50 रुपए , सोहागपुर से बांद्राभान 57 किमी के लिए 72 रुपए, पिपरिया से बांद्राभान 77 किमी के लिए 97 रुपए, बुधनी से बांद्राभान 16 किमी के लिए 20.75 रुपए एवं भोपाल से बांद्राभान 82 किमी के लिए 103.50 रुपए किराया निर्धारित किया गया है।
क्यों लगता है यह मेला
इसका खास महत्व है। इसे लोग मिनीट कुंभ के नाम से भी जानते हैं। नर्मदा नदी और तवा नदी के संगम पर यह मेला लगता है। मान्यता है कि पूर्व में एक राजा को वानर की आकृति से यहां मोक्ष प्राप्त हुआ था। तभी से इस मेले का आयोजन किया जाता है। पूर्णिमा के दिन संगम स्थल पर डुबकी लगाने से लोगों की मनोकामना भी पूरी हो जाती है। किंवदंती है कि संगम पर कई तपस्वियों ने मोक्ष के लिए तपस्या की थी। इसी कारण से आम श्रद्धालु भी यहां आकर स्नान करते हैं। यहां लोग तीन से चार दिन तक रुकते हैं।
Updated on:
27 Oct 2022 05:28 pm
Published on:
27 Oct 2022 05:26 pm
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