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Hanuman Jayanti 2023: यहां चोला चढ़ाने के लिए करना होगा 3 साल तक इंतजार, पूरी होती हैं सारी मन्नतें

-संकट मोचक के चार अनूठे दरबार की कहानी-कामना पूरी होने पर लोग करते है पाठ और भंडारा-खरगोन के चोली गांव में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने स्थापित की थी 11 प्रतिमा, एक अधूरी

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Hanuman Jayanti 2023

नर्मदापुरम। प्रदेश और देशभर में श्रीरामभक्त हनुमान से सैकड़ों मंदिर हैं। इनमें से एक दरबार है हरदा स्थित सिवनी मालवा... नाम है श्री दक्षिणमुखी संकट मोचन हनुमान मंदिर। यहां हर मंगलवार भक्त रामायण पाठ और भंडारा कराते हैं। खास यह कि यहां पाठ व भंडारा कराने पहले से बुकिंग कराना होती है। 2006 से मंदिर में पूजा कर रहे संतोष कुमार शास्त्री बताते हैं, अगले 3 साल तक की बुकिंग फुल है। यानी, कोई भंडारे के लिए आज बुकिंग कराए तो उसका नंबर 3 साल बाद आएगा। बताते हैं, मंदिर और मूर्ति कितनी पुरानी है व भंडारा व पाठ कब से हो रहा है, किसी को नहीं पता।

इतना आसान नहीं यहां आयोजन कराना

माह के अंतिम मंगलवार व अन्नकूट, दशहरा, गुरु पूर्णिमा, हनुमान प्रकटोत्सव व तीज पर स्थानीय लोग आयोजन कराते हैं, इन दिनों की बुकिंग किसी को नहीं दी जाती है। यहां कार्यक्रम कराने भोपाल, इंदौर, महाराष्ट तक के भक्त आते हैं।

ऐसे होती बुकिंग

आयोजन कराने के इच्छुक व्यक्ति मंदिर आकर या फोन पर नंबर लगा सकते हैं। कार्यक्रम के लिए सामग्री, हलवाई मंदिर समिति नि:शुल्क देती है।

बेटा हुआ तो नासिक से आए पाठ कराने

नासिक की अंजलि पति राजकुमार राठौर बताती हैं, उन्होंने 2019 को संतान की मन्नत मांगी थी। जब बेटा हुआ तो अगस्त 2022 में भंडारा कराया था। सेवानिवृत्त शिक्षक प्रेमनारायण पांडे (95) कहते हैं, जब से होश संभाला है यहां पर पाठ और भंडारा होते हुए देख रहे हैं।

छिंदवाड़ा...जब चोरी से बचाने लेट गए हनुमानजी

छिंदवाड़ा में सौंसर मुख्यालय से 12 किमी की दूरी पर आस्था का केंद्र विश्व प्रसिद्ध चमत्कारी जामसांवली हनुमान मंदिर है। यहां लेटे हुए हनुमानजी हैं। उनकी नाभि से जलधारा बहती रहती है। यहां मप्र, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तरप्रदेश सहित अन्य प्रांतों से भक्त उमड़ते हैं। यहां हनुमानजी की मूर्ति निद्रावस्था में हैं। मान्यता है सालों पहले यहां चोरी करने कुछ चोर आए थे, उन्हें पता चला कि इस प्रतिमा के नीचे बहुत धन है। तब मूर्ति खड़ी थी। चोरों ने मूर्ति हटाने का प्रयास किया। चोरी से बचाने हनुमानजी की मूर्ति लेट गई। भगवान की मूर्ति और इसकी स्थापना किसने की, इसका कोई प्रमाण नहीं है। तथ्य के अनुसार स्वयं यहां भगवान प्रकट हुए।

100 साल पुराना मंदिर

नागपुर रोड पर जामसांवली गांव है। यहां लेटे हुए हनुमान को ‘स्वयंभू’ यानी स्वयं निर्मित माना जाता है। कोई नहीं बता सकता कि मूर्ति कितनी पुरानी है। लोगों का मानना है कि हनुमानजी की सोने की अद्भुत स्थिति पीपल की जड़ों से स्व-निर्मित है। मान्यता है, भगवान राम पीपल के पेड़ की भूमिका में खड़े हैं और हनुमानजी उनके पैरों पर सो रहे हैं। शासकीय दस्तावेजों के अनुसार मंदिर करीब 100 साल पुराना है।

संजीवनी ले जाते रतलाम में रुके थे हनुमान, यह गांव नशामुक्त

रतलाम में संजीवनी बूटी ले जाते समय हनुमान माही नदी के तट पर कुछ देर ठहरे थे। यहां आज बजरंग बली का मंदिर है। गांव का नाम है बजरंगगढ़, जो रतलाम का आदिवासी बहुल गांव है। बजरंगबली में आस्था इतनी है कि अधिकांश लोग कुरीतियों से दूर हैं। दावा है, गांव नशामुक्त है। दहेज लेन-देन नहीं होता है। कुछ ग्रामीणों का कहना है, हनुमान जी का मंदिर कई सौ साल पुराना है। 300 साल पहले राजा रतन सिंह शिकार के लिए आते थे तो हनुमान जी के दर्शन जरूर करते थे।