
नर्मदापुरम। श्राद्ध पक्ष में वैसे तो शुभ कार्य वर्जित होते हैं। नई वस्तुएं, कपड़े या अन्य संपत्ति खरीदने की मनाही रहती है। हालांकि इन 16 दिनों में अष्टमी का दिन विशेष रूप से शुभ माना गया है। श्राद्ध पक्ष में आने वाली अष्टमी को लक्ष्मी का वरदान प्राप्त है। यह दिन विशेष इसलिए भी है कि इस दिन सोना खरीदने का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा सोना आठ गुना बढ़ता है। शादी की खरीदारी के लिए भी यह दिन उपयुक्त माना गया है। इस दिन हाथी पर सवार मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार 17 सितंबर गजलक्ष्मी का पूजन होगा।
राधाष्टमी से शुरू हो जाता है आयोजन
ज्योतिषाचार्य पं. सोमेश परसाई ने बताया कि गजलक्ष्मी या सिद्ध लक्ष्मी की आराधना का आयोजन राधाष्टमी से शुरू हो जाता है। पं. परसाई ने बताया कि इस दिन दूर्वा का जन्म हुआ था। राधाष्टमी से महालक्ष्मी तक 16 दिन दूर्वा से स्नान किया जाता है। 16 दिन महालक्ष्मी का पूजन करने से महालक्ष्मी खुश होती हैं। पं. परसाई ने बताया कि लोगों ने लक्ष्मी का मतलब सिर्फ पैसा को मान लिया है जबकि शास्त्रों में शांति, तुष्टि, एश्वर्य और भौतिक सुख को भी लक्ष्मी का पर्याय माना गया है।
शाम के समय होती है पूजा
शाम के समय स्नान कर घर के देवालय में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर केसर मिले चंदन से अष्टदल बनाकर उस पर चावल रख जल कलश रखें। कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति प्रतिष्ठित करें। मिट्टी का हाथी बाजार से लाकर या घर में बना कर उसे स्वर्णाभूषणों से सजाएं। नए खरीदा सोना हाथी पर रखने से पूजा का विशेष लाभ मिलता है। माता लक्ष्मी की मूर्ति के सामने श्रीयंत्र भी रखें। कमल के फूल से पूजन करें। सोने-चांदी के सिक्के, मिठाई, फल भी रखें। माता लक्ष्मी के आठ रूपों की इन मंत्रों के साथ कुंकुम, अक्षत और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें। इसके बाद धूप और घी के दीप से पूजा कर नैवेद्य या भोग लगाएं। महालक्ष्मी की आरती करें।
इन मंत्रों का करें जाप
ओम आद्यलक्ष्म्यै नम:
ओम विद्यालक्ष्म्यै नम:
ओम सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:
ओम अमृतलक्ष्म्यै नम:
ओम कामलक्ष्म्यै नम:
ओम सत्यलक्ष्म्यै नम:
ओम भोगलक्ष्म्यै नम:
ओम योगलक्ष्म्यै नम:
Updated on:
15 Sept 2022 06:21 pm
Published on:
15 Sept 2022 06:19 pm
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