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कैद में मां, बच्चों को पढ़ा रही पुलिस

मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम में स्थित जेल में बंदी महिलाओं के बच्चों को पुलिस ही पढ़ा रही है, पुलिस ने बंदी महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई शुरू करवा दी है, ताकि उनके बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़े रहें।

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नर्मदापुरम. अगर किसी महिला को जेल हो जाए, तो फिर उसके बच्चों का जीवन नरक हो जाता है, क्योंकि फिर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता है, लेकिन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम में स्थित जेल में बंदी महिलाओं के बच्चों को पुलिस ही पढ़ा रही है, पुलिस ने बंदी महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई शुरू करवा दी है, ताकि उनके बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़े रहें।

दरअसल कारागाह ऐसी जगह है जहां समाज विरोधी एवं संविधान में दर्शित नियम-कानून तोडऩे पर सजा के बतौर किए या हुए अपराध का बोध होता है। जेल के अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यशैली व व्यवहार पर सवाल भी उठते हैं, लेकिन नर्मदापुरम सेंट्रल जेल में अधिकारी-कर्मचारी अपनी ड्यूटी के साथ ही कुछ ऐसे भी नेक व अच्छे कार्य कर रहे हैं ।

ऐसे ही अधिकारी रितुराज दांगी हैं, जिन्होंने जेल अधीक्षक संतोष सोलंकी से बंदियों के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाई और इन्हें आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की इच्छा जाहिर की। अनुमति मिली तो बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्रियां जुटाई। लेकिन समस्या यह थी कि जेल परिसर में न तो स्कूल है और न ही आंगनबाड़ी। इसके बाद पुलिस विभाग से संपर्क करके पुलिस लाइन की बंद पड़ी आंगनबाड़ी को चालू कराया गया। जिसके बाद दो बच्चों को प्रवेश दिलाया गया। अब ये रोजाना खेलकूद, मनोरंजन के साथ ही प्राथमिक शिक्षा भी ले रहे हैं।

जेल अधीक्षक सोलंकी बताते हैं कि बच्चों के मानसिक व शैक्षणिक विकास के लिए जनसहयोग व अधिकारी-कर्मचारियों की मदद से ये काम किया जा रहा है। जेल में दंडित महिला बंदी ललिता एवं सोनम के बच्चों को आंगनबाड़ी में भर्ती कराया है। ऐसे में भले ही महिला जेल में है। लेकिन उनके बच्चों को पुलिस पढ़ा रही है।

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