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मजदूर माता-पिता का बेटा कैसे बन गया डॉक्टर, प्रेरणा देती है इनके संघर्ष की कहानी

महुआखेड़ा कला के बसंत कुमार अहिरवार ने बढ़ाया गांव का मान, ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए करेंगे काम...।

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inspirational story

सोहागपुर। कठिन परिश्रम और समर्पण हो तो कोई भी कठनाई और परेशानियां सफलता में बाधा नहीं बन सकती। यह साबित कर दिखाया है छोटे से गांव महुआखेड़ा कला के बसंत कुमार अहिरवार ने। मजदूर माता-पिता के बेटे बसंत ने कड़ी मेहनत के बाद अपनी एमबीबीएस (mbbs) की डिग्री पूरी की है। इस युवक की कहानी (inspirational story) सभी को प्रेरणा दे रही है।

परिवार के उमाशंकर चौधरी ने बताया कि मजदूर पिता भगवत प्रसाद और मां ज्ञान बाई ने बेटे के डॉक्टर बनने की इच्छा में कोई कमी नहीं आने दी। बसंत अहिरवार ने शोभापुर के शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल से कक्षा 12वीं के बाद पीएमटी उत्तीर्ण कर रीवा मेडिकल कॉलेज (rewa medical college) से एमबीबीएस किया। पिछले दिनों डॉ. बसंत कुमार (dr basant kumar ahirwar) को डिग्री मिली है। यह सम्मान उन्हें श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा में मिला है। जहां विशेष रूप से डीन एवं पुलिस कमिश्नर ने बसंत कुमार को सम्मानित किया। इस अवसर पर बसंत कुमार के माता-पिता भी उपस्थित थे, जिन्होंने बेटे की उपलब्धि पर गर्व का अनुभव किया।

उल्लेखनीय है कि बसंत कुमार अपने माता-पिता की चार संतानों में से एकमात्र पुत्र हैं। उनकी तीन बहने हैं तथा तीनों का विवाह हो चुका है। बसंत कुमार व उनकी बहनों को माता-पिता ने मजदूरी करते हुए पाला तथा अच्छी शिक्षा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

डॉक्टर बसंत कुमार अहिरवार से बताया कि हिंदी माध्यम से 12वीं पास करने के बाद डॉक्टर बनना तय किया। माता-पिता के सामने बात रखी तो उन्होंने हौसला बढ़ाया और आगे की पढ़ाई के लिए परिचितों-रिश्तेदारों से रुपए उधार लिए। अब यह राशि वापस करने का काम वह कर रहे हैं। बसंत ने बताया कि वे ग्रामीण परिवेश से आते हैं, उन्होंने यहां स्वास्थ्य सेवाओं में कमी को नजदीक से देखा है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र की बेहतरी के लिए काम करना चाहते हैं।

उनकी इच्छा है कि नर्मदापुरम जिले में ही उन्हें नियुक्ति मिले, ताकि वे जिले की सेवा एक चिकित्सक के रूप में कर सकें। वे अन्य शिक्षित युवाओं को भी समय-समय पर बेहतर कॅरियर के लिए मार्गदर्शन देना चाहेंगे।