
Twin city plan in trouble, economy and income growth stuck due to lack of expansion of the city
नर्मदापुरम.
नर्मदापुरम और इटारसी नगर पालिका के आपसी विवाद की वजह से दोनों शहरों के एक साथ समुचित विकास के लिए बनी ट्विन सिटी योजना ने कागजों में ही दम तोड़ दिया। इस योजना से दोनों शहरों को एक करके विकास करने की योजना थी। इससे करोड़ों रुपए अतिरिक्त बजट मिलता और शहरों में तेजी से विकास कार्य होते। लेकिन दोनों ही नगर पालिकाएं अपने-अपने यहां मुख्यालय बनाने की जिद पर अड़ी रहीं। नतीजा योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। इसी वजह से शहर का विस्तार धीमी गति से हो रहा है। जिसका असर हमारी इकोनॉमी और इनकम ग्रोथ पर भी पड़ रहा है।
मुख्यालय बनाने के विवाद में अटका प्लान-
वर्ष 2015 में इटारसी नपा ने परिषद से प्रस्ताव पास कराकर जिला शहरी विकास अभिकरण कार्यालय भेजा था। इस प्रस्ताव के साथ ही यह मांग भी इटारसी नपा ने रखी कि नर्मदापुरम में पहले ही जिला मुख्यालय है। इसलिए दोनों शहरों के समरूप विकास के लिए ट्विन सिटी का मुख्यालय इटारसी में रखा जाए। जिस पर नर्मदापुरम नगरपालिका ने आपत्ति ली थी। नर्मदापुरम नपा ने मुख्यालय नर्मदापुरम में ही रखने के लिए कहा था। जिस पर सहमति नहीं बनने से विकास का यह बड़ा प्रोजेक्ट फाइलों में ही सिमटकर रह गया।
यह होता फायदा-
योजना में नगर पालिका की जगह नगर निगम का दर्जा मिलता। जिससे केंद्रीय और राज्य से निगमों को मिलने वाला करोड़ों रुपए का अनुदान आता। बजट ज्यादा मिलने से विकास कार्य तेजी से होते। नगर निगमों को मिलने वाले अधिकार भी मिलते। क्षेत्र विस्तार होने से नए रिहायशी और व्यवसायिक इलाके विकसित होते। लोगों को रोजगार मुहैया होता।
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इनका कहना है...
हमने प्रस्ताव पास करके भेजा था। इटारसी नपा अपने यहां मुख्यालय बनाना चाहती थी, जबकि हमारा कहना था कि मुख्यालय पर ही मुख्यालय होना चाहिए।
-अखिलेश खंडेलवाल, पूर्व अध्यक्ष नपा नर्मदापुरम
हमने परिषद से प्रस्ताव पास कराकर शासन को भेजा था। इसके बाद आगे की कार्रवाई शासन स्तर से होना थी।
-सुधा अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष नपा इटारसी
इटारसी ने मुख्यालय की मांग प्रस्ताव के साथ की थी। जिस पर सहमति नहीं बनी थी। इसलिए प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका था।
-अमरसत्य गुप्ता, तत्कालीन परियोजना अधिकारी शहरी विकास प्राधिकरण नर्मदापुरम
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एक्सपर्ट व्यू : फोटो : डॉ. कश्मीर सिंह उप्पल, अर्थशास्त्री
पुराने समय में इटारसी और नर्मदापुरम जैसे शहर रेलवे स्टेशन के आसपास ही बसाए गए थे। जिससे लोग व व्यापारिक गतिविधियां आसानी से चल सकें। समय बदलने के साथ कई शहर अपना विस्तार करते हुए फैल गए हैं। लेकिन इटारसी और नर्मदापुरम शहर अब भी पुराने इलाकों में सिमटकर रह गए हैं। यही सबसे बड़ी वजह है दोनों शहरों की अर्थव्यवस्था में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। शहरों के विस्तार से नए व्यवसायिक और रिहायशी क्षेत्र विकसित होते हैं। जिससे व्यापार, व्यवसाय तो बढ़ता ही है, अर्थव्यवस्था में भी तेजी से बदलाव आता है। इसलिए शहरों का विस्तार जरूरी है।
Published on:
19 Sept 2023 08:36 pm
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