
Rafale fighter jet (Photo - IANS)
भारतीय रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) द्वारा फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद को मंजूरी दिए जाने के बाद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार होगा जब राफेल विमान फ्रांस के बाहर बनाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ के तहत लागू की जाएगी और इसे सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित किया जाएगा। इसके लिए न्यूनतम 40 से 50 प्रतिशत स्थानीयकरण का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना की प्रमुख विशेषता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन विमानों में भारतीय हथियारों और प्रणालियों को भी एकीकृत किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम से भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) में लड़ाकू विमानों को अपेक्षाकृत जल्दी शामिल करने में मदद मिलेगी। राफेल मरीन का पहला विमान वर्ष 2028 से आना शुरू होगा, जबकि वायु सेना के लिए राफेल विमान लगभग ढाई वर्ष बाद मिलने शुरू होंगे।
बता दें कि यह निर्णय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में विभिन्न सेवा प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने के बाद आया है, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपए है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) भारतीय वायु सेना की हवाई क्षमता को बढ़ाएंगे और लंबी दूरी के आक्रामक अभियानों में उसकी ताकत मजबूत करेंगे। अधिकांश MRFA विमान भारत में ही निर्मित किए जाएंगे। कॉम्बैट मिसाइलें उच्च सटीकता के साथ लंबी दूरी से जमीन पर हमले की क्षमता प्रदान करेंगी। वहीं, AS-HAPS का उपयोग खुफिया, निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और दूरसंचार जैसे कार्यों के लिए किया जाएगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक तीन दिवसीय भारत दौरे पर आएंगे। इस दौरान इस रक्षा सौदे पर अंतिम सहमति बनने की उम्मीद है। यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ के तहत किया जाएगा। डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी में इन विमानों का निर्माण करेगी। कंपनी की ओर से सभी 114 राफेल जेट में भारतीय हथियारों, मिसाइलों और गोला-बारूद को एकीकृत किया जाएगा।
Updated on:
13 Feb 2026, 2:37 PM IST
Published on:
13 Feb 2026, 2:36 PM IST
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