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इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 15 लाख लोगों को मिलेगी नई नौकरियां, पांच गुना बढ़ेगा मोबाइल का निर्यात

केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावा किया कि भारत से मोबाइल फोन का निर्यात आने वाले समय में पांच गुना से अधिक बढ़कर 50-60 अरब डॉलर के आंकड़े तक पहुंच जाएगा।

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सरकार की मेक इन इंडिया मुहिम का असर दिखने लगा है। पिछले साल भारत से लगभग 11 अरब डॉलर यानी करीब 91,000 करोड़ रुपए के मोबाइल का निर्यात हुआ। केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावा किया कि भारत से मोबाइल फोन का निर्यात आने वाले समय में पांच गुना से अधिक बढ़कर 50-60 अरब डॉलर यानी करीब 05 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े तक पहुंच जाएगा। साथ ही इस सेक्टर में कर्मचारियों की संख्या भी बढ़कर 25 लाख तक पहुंच जाएगी। फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 10 लाख लोग काम करते हैं। यानी इस क्षेत्र में 15 लाख नई नौकरियां पैदी होंगी।

5,500 किलोमीटर की रेल लाइन जोड़ेंगे

अश्विनी वैष्णव नेने कहा कि 10 साल पहले भारत 98 फीसदी मोबाइल फोन का आयात करता था, लेकिन आज लगभग 99 फीसदी फोन भारत में ही बनते हैं। उन्होंने कहा कि भारत 2027 तक दुनियी की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। इस समय देश जब पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है तो हमने रेलवे, राजमार्ग, हवाई अड्डे के क्षेत्रों में विशाल बुनियादी ढांचा तैयार किया है। पिछले साल 5,200 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनाई गई जो स्विट्जरलैंड के समूचे रेल नेटवर्क के बराबर है। चालू वित्त वर्ष में हम 5,500 किलोमीटर की रेल लाइन जोड़ेंगे।

आरबीआई ने किया करार, अब इंडोनेशिया में भी चलेगा अपना रुपया

मुंबई। अब इंडोनेशिया में पेमेंट करना और आसान हो जाएगा और करेंसी बदलने की झंझट नहीं रह जाएगी। भारतीय पर्यटक वहां रुपए में भी पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए आरबीआई ने इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। आरबीआई के मुताबिक, इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच आपसी लेन-देन में भारतीय रुपए और इंडोनेशियाई रुपिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। इससे आयातकों और निर्यातकों को यह फायदा होगा कि वे घरेलू करेंसी में इनवॉइस बना सकेंगे घरेलू करेंसी में पेमेंट कर सकेंगे। इससे इंडियन रुपए और इंडोनेशियल रुपिया के लिए फॉरेन एक्सचेंज मार्केट भी तैयार होगा।

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