
संसद में कौन कितना एक्टिव। (फोटो- ANI)
Lok Sabha Sessions देश की जनता सांसदों को चुनकर लोकसभा में अपनी आवाज पहुंचाने भेजती है, लेकिन संसद में हाल बुरे हैं। औसत 25 से 30 फीसदी सांसद जनता के मुद्दे उठाने मुंह तक नहीं खोलते।
दिलचस्प ये कि पहले सत्र को छोड़कर ऐसा एक भी सत्र नहीं जब 60-70 फीसदी से ज्यादा सांसदों ने सदन में सक्रियता दिखाई हो। मौजूदा 18वीं लोकसभा के बीते शीतकालीन सत्र में 542 में से केवल 377 ने डिबेट में हिस्सा लिया।
वहीं 165 खामोश ही रहे। इससे पहले जुलाई 2025 के मानसून सत्र में तो महज 251 सांसदों ने ही भागीदारी की थी। खास बात है कि 73.39 घंटे चले इस शीतकालीन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जगदंबिका पाल, सौगता राय और मनीष तिवारी को छोड़कर ऐसा कोई मंत्री-सांसद नहीं रहा, जो एक घंटे से ज्यादा बोला हो।
18वीं लोकसभा के कुल 367.51 घंटे चले 6 सत्रों में बमुश्किल पांच-सात नेता ही हैं, जिनके एक घंटे से ज्यादा बोलने का रिकॉर्ड है।
| सत्र | समय | भागीदारी | कुल समय | भागीदारी प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| पहला सत्र | 08:28:00 | 0.64 | 28:56:00 | 07.87 |
| दूसरा सत्र | 3:34:00 | 0.27 | 76:03:00 | 20.67 |
| तीसरा सत्र | 2:23:00 | 0.18 | 38:02:30 | 10.34 |
| चौथा सत्र | रिकॉर्ड नहीं | रिकॉर्ड नहीं | 123:09:52 | 33.48 |
| पांचवां सत्र | 7:11:00 | 0.55 | 28:00:59 | 07.62 |
| छठां सत्र | 348:02:00 | 26.45 | 73:39:26 | 20.02 |
| कुल | 367:51:47 | |||
| (368.98 घंटे लगभग) |
(नोट-17वीं लोकसभा कुल 15 सत्र में 1315 घंटे 59 मिनट 49 सेकंड चली।)
सदन की सामान्य डिबेट शामिल है, लेकिन सदन में पेश दस्तावेज, अनुच्छेद-377 के मामले, पूरक प्रश्न पर मंत्री उत्तर, शोक संदेश-घोषणा के अलावा अन्य संदर्भ, अध्यक्ष के निर्णय-अवलोकन, राज्यसभा मंत्री भागीदारी, संसदीय कार्यमंत्री वक्तव व मंत्री-सदस्य हस्तक्षेप शामिल नहीं हैं।
सदस्यों को समय राज्य सीट संख्या, पार्टी सदस्य संख्या व निर्धारित शेड्यूल के हिसाब से मिलता है। उप्र को ज्यादा सीट व भाजपा को सदस्य संख्या का फायदा मिलता है। पीएम-मंत्री का रिकॉर्ड अलग तरीके से रहता है। विलोपित को छोड़ जो रिकॉर्ड पर लिया जाता है वह विभिन्न नियमों के हिसाब से शामिल है।
| सत्र | सदस्यों की संख्या (बोले) | बोले (प्रतिशत में) |
|---|---|---|
| सत्र-1 | 538 | 07.87 |
| सत्र-2 | 334 | 20.67 |
| सत्र-3 | 191 | 10.34 |
| सत्र-4 | 426 | 33.48 |
| सत्र-5 | 251 | 07.62 |
| सत्र-6 | 377 | 20.02 |
अनेक सांसदों ने सदन में भागीदारी के लिए उपस्थिति की रस्म-अदायगी जरूर पूरी की, लेकिन खामोश ही रहे। इसमें अनेक बड़े चेहरे भी हैं। 18वीं लोकसभा में पहले, दूसरे व तीसरे सत्र में 482-482 सदस्य आए, जबकि 60 गैरहाजिर रहे।
वहीं चौथे सत्र में 485 आए व 57 गैरहाजिर रहे। पांचवें में 484 आए और 58 गैरहाजिर रहे। वहीं बीते छठे सत्र में 486 हाजिर और 56 सांसद अनुपस्थित रहे।
| सांसद का नाम | पूछे गए सवालों की संख्या |
|---|---|
| राहुल गांधी | 34 |
| प्रियंका गांधी | 14 |
| डिम्पल यादव | 08 |
| असदुद्दीन ओवैसी | 87 |
| शशि थरूर | 93 |
| हेमा मालिनी | 23 |
| रवि किशन | 183 |
| शत्रुघ्न सिन्हा | 06 |
| कंगना रनौत | 129 |
| मनोज तिवारी | 182 |
संसद रिकॉर्ड में रजिस्टर पर हस्ताक्षर के आधार पर 15 दिन के बीते शीतकालीन सत्र में हेमा मालिनी एक भी दिन नहीं आई। प्रियंका गांधी एक दिन, अखिलेश यादव दस दिन, डिंपल यादव दो दिन, मनोज तिवारी एक दिन, असुद्दीन औवेसी व शशि थरूर तीन दिन, रविकिशन नौ दिन और शत्रुघन सिन्हा सात दिन गैरहाजिर रहे।
Updated on:
03 Jan 2026 07:41 am
Published on:
03 Jan 2026 07:38 am
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